कपास जैसा प्रेम: त्याग, निष्ठा और साथ निभाने का आदर्श
✍️ नवनीत मिश्र “प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास।जीते जी तन ढके, मरे न छोड़े साथ॥” यह दोहा संत परंपरा के अमर कवि कबीर की वाणी का सार…
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✍️ नवनीत मिश्र “प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास।जीते जी तन ढके, मरे न छोड़े साथ॥” यह दोहा संत परंपरा के अमर कवि कबीर की वाणी का सार…
डॉ. सतीश पाण्डेय महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मानव जीवन केवल जन्म, कर्म और मृत्यु की यांत्रिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह चेतना के निरंतर विकास की एक गहन और अर्थपूर्ण…