लोकतंत्र अपनी भाषा में पुष्पित, पल्लवित एवं समृद्धि होती है– प्रो. चित्तरंजन मिश्र
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की मजबूती अपनी भाषा में ही सम्भव है, भारत में संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा एवं राजभाषा अधिनियम के बारे में वर्णित है।…