सच है, सत्य मानो जैसे पाताल में खो गया हो,अब तो झूठ ही जगत पर छाया हुआ प्रतीत होता है।पुरानी…
— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ…
लेखक: डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’ लेखक सुप्रभात तो एक बहाना हैजब सूर्य की कृपा होती है, सूर्य कीकिरणें प्रकाश…