किसी के बोल में मिठास होती है,
पर उसकी नियत में खोट होती है,
किसी किसी के बोल कड़वे होते हैं,
पर उनकी नियत अनमोल होती है।
भाई साहब यह दुनिया तो गोल है,
यहाँ अक्सर सबके डबल रोल हैं,
कोई अपना बनकर झाँसा देता है,
कोई बिना झाँसे के ही लूट लेता है।
धर्म के नाम की यहाँ माला जपते हैं,
धर्म को धर्म से वही जुदा भी करते हैं,
धर्म स्वार्थ का समर्थन नहीं करता है,
धर्म सबको त्याग हेतु प्रेरित करता है।
धर्म की राह पर आगे बढ़कर तो देखो
अर्थ और काम से मोक्ष मिल जाता है,
धर्म से प्रेम व द्वेष त्याग कर तो देखो,
अच्छा इंसान हर मोड़ पर मिलता है।
ज़िन्दगी अपना रूप बदलती रहती है,
इसलिए अभिमान से बचना चाहिये,
बुलंदियों पर पहुँचना अच्छी बात है,
पर उसके बाद गुनाह एक बड़ा पाप है।
सारे झगड़े ऐसे खत्म कर देना चाहिए
बिना दोष के भी हाथ जोड़ना चाहिये,
हाथ जोड़ने से तनाव ख़त्म होते हैं,
दूरियाँ मिट जाती, रिश्ते सुदृढ़ होते हैं।
मैं को यदि हम में बदल सकते हों,
और हम अहम् से दूर रह सकते हों,
तो विपरीत समय भी साथ निभाता है,
वरना समय नामोंनिशाँ मिटा देता है।
अनुभव कहता है कि बोल मीठे न हों
तो अक्सर हिचकियाँ भी नहीं आती हैं,
बिना मिठास आदित्य इंसान क्या,
घर में चींटियाँ भी नहीं आती हैं।
डा. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
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