संत कबीर नगर की बेटी स्पेस आर्टिस्ट कर रही है अमेरिका के ब्रह्माण्ड लैब के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट पर काम
नवनीत मिश्र
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के खलीलाबाद क्षेत्र के गंगा देवरिया गांव की स्पेस आर्टिस्ट सुष्मिता सिंह बक्की एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही हैं, जो आधुनिक विज्ञान, भारतीय प्राचीन दर्शन और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। कंप्यूटर साइंस इंजीनियर सुष्मिता सिंह बक्की पिछले सात वर्षों से स्पेस आर्ट के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी कलाकृतियों के माध्यम से अंतरिक्ष में भारत के योगदान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
संयुक्त परिवार से आने वाली सुष्मिता सिंह बक्की के दादा गजेंद्र नाथ सिंह, पिता नित्यानंद सिंह और माता पूर्णिमा सिंह हैं। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद सुष्मिता सिंह बक्की ने ब्रह्मांड और ऊर्जा जैसे गूढ़ विषयों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करने का मार्ग चुना।

प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए सुष्मिता सिंह बक्की कहतीं है रॉकेट वैज्ञानिक डॉ. क्षितिज मल्ल द्वारा शुरू किया गया यह विशेष प्रोजेक्ट “फ्लो ऑफ एनर्जी इन दि कॉसमॉस-भारत का योगदान” शीर्षक से संचालित हो रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य विश्व समुदाय को ऊर्जा से जुड़े भारत के प्राचीन सिद्धांतों से पुनः परिचित कराना है, जिन्हें सृष्टि की उत्पत्ति का मूल आधार माना गया है।
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सुष्मिता द्वारा बनाई गई एक विशेष पेंटिंग 13,500 किलोमीटर की दूरी तय कर संत कबीर नगर भारत से नासा, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका जाएगी। यह पेंटिंग डॉ. क्षितिज मल्ल द्वारा स्थापित ‘ब्रह्माण्ड लैब’ का हिस्सा बनेगी।
इस श्रृंखला की खासियत बताते हुए सुष्मिता सिंह बक्की बताती हैं कि इस श्रृंखला की पहली पेंटिंग ‘दस महाविद्या’ और ब्रह्मांडीय ऊर्जा की अवधारणा को दर्शाती है। इसमें भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में वर्णित ऊर्जा के विभिन्न रूपों को आधुनिक अंतरिक्षीय दृष्टिकोण से जोड़ा गया है। सुष्मिता सिंह बक्की की यह कृति हाल ही में कई कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी है।

श्रृंखला की दूसरी पेंटिंग, जिस पर सुष्मिता सिंह बक्की कार्य कर रही हैं, ‘बिग बैंग थ्योरी’ और ‘हिरण्यगर्भ’ जैसे विषयों पर आधारित है। इस पेंटिंग के माध्यम से सुष्मिता सिंह बक्की आधुनिक विज्ञान और वैदिक चिंतन के बीच एक संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं।
सुश्री सिंह का मानना है कि हर सभ्यता का अपना तरीका होता है जीवन और ब्रह्मांड के मूल आधारों को समझने का, और सुष्मिता सिंह बक्की का यह प्रोजेक्ट विज्ञान और परंपरा के बीच एक सेतु का कार्य करेगा।
सुष्मिता सिंह बक्की केवल स्पेस आर्ट तक सीमित नहीं हैं। वे लोक कला और सामाजिक विषयों पर भी कार्य कर चुकी हैं। सुष्मिता सिंह बक्की की चर्चित श्रृंखला “बियाह” को विशेष पहचान मिली थी। उनकी स्पेस आर्ट की बानगी इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद तक पहुंच चुकी है और सुष्मिता सिंह बक्की को नासा के वैज्ञानिकों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त हुआ है।
स्पेस आर्ट वह विधा है, जिसके माध्यम से सुष्मिता सिंह बक्की जैसे कलाकार ब्रह्मांड, ग्रहों, तारों और अंतरिक्ष अन्वेषण को दृश्य रूप प्रदान करते हैं। विज्ञान और कल्पना के इस संगम को सुष्मिता सिंह बक्की अपनी पेंटिंग्स के जरिए नई दिशा दे रही हैं।

ऊर्जा को सृष्टि का मूल आधार मानते हुए सुष्मिता सिंह बक्की का यह प्रयास भारत के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
