बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
ईसारपीठापट्टी गांव के वर्तमान प्रधान एवं प्रधान संघ के अध्यक्ष शिव शंकर यादव के आकस्मिक निधन की दुःखद सूचना से पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया है। बताया जा रहा है कि उनकी मृत्यु नोएडा में हृदयगति रुकने से हुई। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों को इस असमय हुई क्षति पर विश्वास करना कठिन हो रहा है। शिव शंकर यादव लंबे समय से सक्रिय और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। उन्होंने चार बार ग्राम प्रधान के रूप में गांव की कमान संभाली और इस बार भी जनता के विश्वास पर खरे उतरते हुए प्रधान निर्वाचित हुए थे। इसके साथ ही वे प्रधान संघ के अध्यक्ष तथा ब्लॉक स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके नेतृत्व में गांव में अनेक विकास कार्य हुए, जिनकी चर्चा आज भी ग्रामीण गर्व से करते हैं।उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सहज और मिलनसार था। वे हर वर्ग के लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे। चाहे गरीब परिवार की समस्या हो या गांव के किसी सार्वजनिक कार्य का मुद्दा, वे हमेशा आगे बढ़कर समाधान कराने का प्रयास करते थे। जनसेवा को उन्होंने सच मायनों में अपना धर्म बना लिया था। यही कारण था कि वे केवल एक प्रधान नहीं, बल्कि गांव के संरक्षक के रूप में देखे जाते थे।ग्रामीणों का कहना है कि श्री यादव ने अपने कार्यकाल में सड़क, नाली, पेयजल, आवास योजना और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया। वे गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या को गंभीरता से लेते थे और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान कराने की पूरी कोशिश करते थे। उनके प्रयासों से कई जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सका।उनके व्यवहार में कभी भी अहंकार नहीं झलकता था। बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और युवाओं को आगे बढ़ाने की सोच ने उन्हें सबका प्रिय बना दिया था। सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक बैठकों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। वे लोगों को जोड़ने और गांव में आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे।
अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो पुत्र—चन्द्रजीत और चन्द्रपाल—तथा पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्यों का दुख देखकर गांव के लोगों की आंखें भी नम हो जा रही हैं। हर कोई इस कठिन समय में परिवार को ढांढस बंधा रहा है।उनके असामयिक निधन से न केवल ईसारपीठापट्टी गांव ने एक कर्मठ प्रधान खोया है, बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक संवेदनशील, समर्पित और सच्चा जनप्रतिनिधि खो दिया है। अंतिम दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।ग्रामीणों की जुबान पर एक ही बात है—“ऐसा जनसेवक मिलना दुर्लभ है।” श्री शिव शंकर यादव की कमी लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी। उनकी जनसेवा, सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
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