गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रस्तावित 6 फरवरी को मंडलायुक्त के निरीक्षण से पहले गोरखपुर कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने पर्यटन भवन स्थित कलेक्ट्रेट के सभी विभागों में संचालित फाइलों की व्यापक और सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है। खासतौर पर कर्मचारियों से जुड़ी जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) और एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) से संबंधित लंबित और अद्यतन न की गई फाइलों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा रहा है।
इस पूरे अभियान की निगरानी जिलाधिकारी दीपक मीणा स्वयं कर रहे हैं। डीएम ने वीडियो कॉल के माध्यम से अधिकारियों से नियमित फीडबैक लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जीपीएफ और एनपीएस जैसी संवेदनशील फाइलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी की सेवा पुस्तिका, जीपीएफ खाते की प्रविष्टियां और एनपीएस से जुड़े दस्तावेज पूर्ण, अद्यतन और ऑनलाइन सत्यापित होने चाहिए।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया विभागवार निरीक्षण
डीएम के निर्देशों के अनुपालन में वरिष्ठ अधिकारियों ने पर्यटन भवन और कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न अनुभागों का विधिवत निरीक्षण किया। इस दौरान एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा, एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी हिमांशु वर्मा और सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव ने एक-एक विभाग की फाइलों का क्रमवार मुआयना किया। निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति का आकलन कर कमियों को समय रहते दूर करना रहा।
निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि पुरानी सेवा शर्तों के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के जीपीएफ खाते नियमित रूप से अपडेट हों, जबकि नई नियुक्तियों के मामलों में एनपीएस फाइलें पूरी हों और पोर्टल पर सही तरीके से अपलोड की गई हों। जिन विभागों में तकनीकी त्रुटियां, दस्तावेजों की कमी या लंबे समय से लंबित प्रविष्टियां पाई गईं, वहां संबंधित लिपिकों और अनुभाग प्रभारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। साथ ही समय-सीमा में सुधार न होने पर जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी भी दी गई।
सभी प्रमुख अनुभागों की फाइलें खंगाली गईं
कलेक्ट्रेट के सभी विभागों की फाइलों को विभागवार चिन्हित कर सूचीबद्ध किया गया है, ताकि निरीक्षण के समय हर अनुभाग की स्थिति स्पष्ट रहे। जिलाधिकारी कार्यालय में प्रशासनिक आदेश, जनशिकायत, कानून-व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़ी फाइलों की समीक्षा की गई। एडीएम प्रशासन अनुभाग में स्थापना, जीपीएफ–एनपीएस समन्वय और विभागीय जांच से संबंधित फाइलों का परीक्षण हुआ।
एडीएम वित्त एवं राजस्व के अंतर्गत बजट, कोषागार और राजस्व वसूली की फाइलें देखी गईं। एडीएम सिटी कार्यालय में नगर क्षेत्र प्रशासन, अतिक्रमण और शहरी कानून-व्यवस्था से जुड़ी फाइलों का निरीक्षण किया गया। मुख्य राजस्व अधिकारी कार्यालय में नामांतरण, खतौनी, सीमांकन और राजस्व वाद निस्तारण की फाइलें जांची गईं, जबकि सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में मजिस्ट्रियल आदेश, शस्त्र लाइसेंस और जनसुनवाई से जुड़ी फाइलों की स्थिति परखी गई।
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कोषागार, स्थापना और अन्य शाखाओं की विशेष जांच
जिला कोषागार कार्यालय में वेतन, पेंशन, जीपीएफ लेखा और एनपीएस अंशदान की फाइलों की विशेष जांच की गई। स्थापना अनुभाग में कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं, नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण और अवकाश से संबंधित फाइलें देखी गईं। लेखा अनुभाग में बिल, वाउचर और ऑडिट आपत्तियों की समीक्षा की गई, जबकि कानून अनुभाग में शासकीय वाद और पैरवी रिपोर्ट की फाइलें खंगाली गईं।
इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग की राहत और मुआवजा फाइलें, चुनाव शाखा की मतदाता सूची और निर्वाचन से जुड़ी फाइलें, समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं की फाइलें, सूचना एवं जनसंपर्क अनुभाग की प्रेस विज्ञप्ति और मीडिया समन्वय से जुड़ी फाइलें, नजारत अनुभाग, रिकॉर्ड रूम, आईटी/ई-ऑफिस अनुभाग और पर्यटन भवन प्रशासन अनुभाग की फाइलों का भी क्रमवार निरीक्षण किया गया।
डीएम के सख्त निर्देश
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जीपीएफ और एनपीएस से संबंधित फाइलों को अलग से टैग किया जाए, सभी फाइलें इंडेक्स के साथ क्रमबद्ध हों और लंबित मामलों की अलग पेंडेंसी शीट तैयार रखी जाए। साथ ही, प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट नोडल अधिकारियों के माध्यम से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि यह अभियान कर्मचारियों के हित और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों के लिए आवश्यक है। मंडलायुक्त के निरीक्षण से पहले 100 प्रतिशत तैयारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कलेक्ट्रेट की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो अन्य जिलों के लिए उदाहरण बने।
इस सख्त और सुनियोजित कार्रवाई से कर्मचारियों में भी भरोसा बढ़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि जीपीएफ और एनपीएस फाइलों के दुरुस्त होने से भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, गोरखपुर जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पहल केवल निरीक्षण की तैयारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था सुधार की ठोस कोशिश है।
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