नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक गिरकर 81,500 के स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 25,000 के नीचे चला गया। इस भारी बिकवाली से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए। बाजार में यह गिरावट घरेलू और वैश्विक दोनों कारणों से आई है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाजार में यह बड़ी गिरावट कई कारणों से हुई है। आइए जानते हैं वो 5 मुख्य वजहें क्या हैं:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर:
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने वैश्विक बाजारों में बिकवाली को बढ़ावा दिया। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, क्योंकि विदेशी निवेशक (FIIs) तेजी से अपना पैसा निकाल रहे हैं।विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली (FIIs):
आज विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब FIIs ने भारी बिकवाली की है।कमजोर तिमाही नतीजे:
कई बड़ी कंपनियों के अनुमान से कमजोर तिमाही नतीजे सामने आए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। खासकर आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, और बाजार इसे एक नकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
तकनीकी सुधार की जरूरत (Technical Correction):
पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़त के बाद बाजार में एक ‘तकनीकी सुधार’ (Technical Correction) की जरूरत थी, जिसमें कुछ मुनाफावसूली होना सामान्य है।
निवेशकों के लिए सलाह:
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट एक लंबी अवधि के निवेश अवसर के रूप में देखी जा सकती है। जिन निवेशकों ने अच्छी कंपनियों में निवेश किया है, उन्हें घबराना नहीं चाहिए। हालांकि, नए निवेशकों को अभी बाजार में सीधे निवेश करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
