देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जिले का भागलपुर पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। पुल के दोनों ओर लगाए गए हाइट ब्रेकर ने भारी वाहनों की आवाजाही पर कुछ हद तक रोक तो लगाई है, लेकिन इससे जुड़ी नई समस्याएं भी सामने आ रही हैं। ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर नियंत्रण के उद्देश्य से की गई यह व्यवस्था अब स्थानीय नागरिकों के लिए राहत और चिंता—दोनों का कारण बन गई है।
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर बड़े ट्रकों और अत्यधिक ऊंचाई वाले वाहनों का प्रवेश कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से गिट्टी, बालू, सीमेंट और सरिया जैसी निर्माण सामग्री का परिवहन लगातार जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है या सिर्फ वाहनों की श्रेणी बदल गई है?
तेज रफ्तार पर आंशिक नियंत्रण
पुल के भागलपुर छोर पर स्थित पुलिस चौकी के पास बनाए गए स्पीड ब्रेकर का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। यहां से गुजरने वाले वाहन अनिवार्य रूप से धीमे हो जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि पहले जहां तेज रफ्तार ट्रकों और बसों के कारण भय का माहौल रहता था, अब स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हाइट ब्रेकर लगाना ही पर्याप्त समाधान नहीं है। यदि निगरानी और नियमित निरीक्षण न हो, तो ऐसी व्यवस्थाएं धीरे-धीरे प्रभावहीन हो जाती हैं।
दूसरे छोर पर बढ़ी समस्या
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर से जुड़ी सबसे बड़ी शिकायत पुल के दूसरे छोर से सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, हाइट ब्रेकर पर किया गया पेंट धूल और मिट्टी से ढक जाता है, जिससे वह दूर से दिखाई नहीं देता। विशेष रूप से रात के समय यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
कई वाहन चालक समय रहते ब्रेकर को पहचान नहीं पाते और अचानक ब्रेक लगाने या टकराने की स्थिति में वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में कई छोटे-बड़े हादसों की खबरें सामने आई हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाइट ब्रेकर को स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं किया गया, तो यह दुर्घटनाओं को रोकने के बजाय स्वयं दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
रिफ्लेक्टर की गुणवत्ता पर उठे सवाल
कुछ माह पूर्व क्षेत्र के समाजसेवी युवाओं—अंब्रेश कुमार यादव उर्फ मणि, चंद्रकांत शर्मा, संतोष साहनी उर्फ गोलू और सुशील चौरसिया उर्फ बबलू—ने अपनी पहल पर हाइट ब्रेकर पर रात में चमकने वाला रेडियम पेपर लगाया था। उनकी इस पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हुई, क्योंकि इससे रात में ब्रेकर की दृश्यता बढ़ी और दुर्घटनाएं कम हुईं।
हालांकि, समय बीतने के साथ उस रेडियम पेपर पर धूल और मिट्टी जम गई, जिससे उसका रिफ्लेक्शन कमजोर पड़ गया। हाल ही में लगाया गया पीले रंग का रिफ्लेक्शन पेपर भी मात्र दो दिनों में उखड़ गया। इससे व्यवस्था की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोगों का कहना है कि यदि उच्च गुणवत्ता वाले रिफ्लेक्टर और टिकाऊ सामग्री का उपयोग किया जाए, तो यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।
रात में गुजरते भारी वाहन, पारदर्शिता पर प्रश्न
क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि रात के समय कुछ ऐसे भारी वाहन, जिनकी ऊंचाई निर्धारित सीमा से थोड़ी कम होती है, पुल से नियमित रूप से गुजर जाते हैं। इससे हाइट ब्रेकर की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया और यूट्यूब पर स्थानीय लोग वीडियो साझा कर अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस विभागीय कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर को लेकर क्षेत्रवासियों ने कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं—
हाइट ब्रेकर पर नियमित रूप से स्पष्ट और चमकीला रंग-रोगन कराया जाए।
उच्च गुणवत्ता वाले रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।
पुल के दोनों छोर पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ओवरलोडिंग पर प्रभावी निगरानी के लिए नियमित पुलिस जांच हो।
रात के समय विशेष गश्त बढ़ाई जाए।
लोगों का मानना है कि यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
संतुलित समाधान की जरूरत
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाइट ब्रेकर तभी प्रभावी होते हैं जब उन्हें वैज्ञानिक मानकों के अनुसार बनाया और चिह्नित किया जाए। केवल ऊंचाई सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है; उसकी दृश्यता, चेतावनी संकेत और नियमित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि व्यवस्था में सुधार की काफी गुंजाइश है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह पहल राहत के बजाय जोखिम का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
भागलपुर पुल देवरिया हाइट ब्रेकर ने ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर आंशिक नियंत्रण जरूर किया है, लेकिन इससे जुड़ी खामियां अब सामने आ रही हैं। धूल से ढके रिफ्लेक्टर, कमजोर गुणवत्ता की सामग्री और रात में अपर्याप्त दृश्यता दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है।
स्थानीय युवाओं की पहल प्रेरणादायक है, परंतु स्थायी समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान दिया जाएगा, ताकि यह पुल सुरक्षा का प्रतीक बने, खतरे का नहीं।
