सड़क हादसे में घायल एसआई ताज अहमद खान का निधन, नम आंखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक
बलिया (राष्ट्र की परम्परा) सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल बिहार पुलिस के उपनिरीक्षक (एसआई) ताज अहमद खान ने आखिरकार जिंदगी की जंग हार दी। उनके निधन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। बुधवार की सुबह रेवती ब्लॉक के सामने स्थित कर्बगाह में नम आंखों और भारी भीड़ के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई के दौरान हर कोई गमगीन नजर आया और माहौल बेहद भावुक हो गया।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते शनिवार को ताज अहमद खान अपने थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय थे। गंज गांव स्थित एक इंडेन गैस गोदाम पर कुछ युवकों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे थे। वहां वे युवकों को समझाने और स्थिति को शांत करने का प्रयास कर रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार से आ रहे एक टोटो वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें एकमा के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया। पटना के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने लगातार प्रयास किया, लेकिन मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
ताज अहमद खान के निधन की खबर जैसे ही उनके पैतृक निवास रेवती पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को पूरे सम्मान के साथ किया गया। कर्बगाह पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
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बताया जाता है कि ताज अहमद खान वर्ष 1990 में बिहार पुलिस में भर्ती हुए थे। अपनी सेवा के दौरान वे एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और व्यवहार कुशल अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे। अपने शांत स्वभाव और जिम्मेदारी निभाने के तरीके के कारण वे सहकर्मियों और आम लोगों के बीच सम्मानित थे। वे वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
खान अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पत्नी जमरूल खातून, तीन बेटे ताहीर खान, तय्यब खान, तौकीर खान और दो बेटियां रजिया परवीन व रूबी परवीन शामिल हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव उनके दुख में सहभागी बना हुआ है।
अंतिम संस्कार के दौरान क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को ढांढस बंधाया। सभी ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए इसे समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी माना।
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यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और ऐसे लापरवाह चालकों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
इस दुखद घटना ने यह भी साबित कर दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटे पुलिसकर्मी कितनी जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं। ताज अहमद खान की मृत्यु न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे पुलिस विभाग और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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