मदद करना सामाजिक दायित्व

कविता

कभी कभी मैं भिक्षुक बन जाता हूँ,
अपने लिये नहीं पर मैं कुछ माँगता हूँ,
सबके लिये सबकी मदद के लिये,
कुछ न कुछ कभी कभी माँग लेता हूँ।

कभी कुछ सामूहिक याचना करता हूँ,
कभी सबके, कभी जनहित के लिये,
अक्सर मैं हर किसी से मदद माँगता हूँ,
कोई मदद करे न करे पर माँगता हूँ।

जीवन में किसी को कुछ दे देना,
किसी की आवश्यक मदद करना,
सामाजिक उत्तरदायित्व निभाता है,
मुँह मोड़ लेना स्वार्थलिप्त बनाता है।

जैसे पौधों से खुशबू, सौंदर्य, फल
और छाया अपने आप मिल जाती है,
वैसे ही भलाई करने से आशीर्वाद
की कृपा स्वतः प्राप्त हो जाती है।

परेशानी आने पर धैर्य, अधिकार
मिलने पर विनम्रता, क्रोध आने पर
शांत रहें और धन आये तो दान देना
यही जीवन का प्रबंधन कहलाता है।

आज किसी की मदद यदि कर दोगे,
कल वही मदद लौट कर आ जायेगी,
आदित्य समाजिकता का यह बंधन,
पारस्परिक सम्बंध को भी सुधारेगी।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpnews@desk

Recent Posts

रामलीला में गूंजा धर्म और पराक्रम का संदेश, श्रीराम के बाणों से कुंभकर्ण का अंत

फोटो goo कुंभकर्ण वध और इंद्रजीत यज्ञ विध्वंस की लीला ने दर्शकों को किया भावविभोर,…

2 hours ago

दशहरा 2026 फैशन: साड़ी-लहंगे से हटकर पहनें ये 4 स्टाइलिश इंडो-वेस्टर्न श्रग सेट्स

दशहरा पर पहनें ट्रेंडी इंडो-वेस्टर्न श्रग सेट्स, सादगी में दिखेंगी सबसे खूबसूरत प्रस्तुति: चन्द्र प्रभा…

2 hours ago

सर्दियों में गीजर ऑन करने से पहले सावधान! इन गलतियों से हो सकता है नुकसान

4 महीने से बंद पड़ा गीजर चालू करने से पहले जरूर करें ये 5 काम,…

2 hours ago

विजयादशमी पर सीएम योगी का संदेश: अहंकार का अंत, सत्य की जीत! प्रभु श्रीराम के आदर्शों से जीवन बदलने का किया आह्वान

फोटो x गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विजयादशमी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने…

2 hours ago

20 अक्टूबर की ऐतिहासिक तारीख: भारत से दुनिया तक, आज के दिन क्या-क्या हुआ?

20 अक्टूबर की अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाएं 2003: बोलीविया में सत्ता परिवर्तनअक्टूबर 2003 में बोलीविया में…

2 hours ago