साहब!मेरा नाम हमेशा अपमान के पर्याय के रूप में लेते हो!आज मेरे नाम पर वैश्विक वफ़ादारी, समर्पण, मेहनतकश और प्रतिबद्धता का दिवस है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर हर उस व्यवहार, कार्य और परिस्थितियों में जहां किसी व्यक्ति का अपमान करना हो, उसे नीचा दिखाना हो, उसे बदनाम करना हो तो, उसे बोलने वाले प्राथमिक अस्वस्थ्य भाषा ठठोली क़े प्रतीक के रूप में कुत्ता शब्द का प्रयोग किया जाता है, वैसे तो इस बोध में अनेक पशु-पक्षी व जानवरों का नाम जैसे गधा,उल्लू सांड गिरगिट, काला नाग जैसे अनेक जानवरों के नामों का प्रयोग किया जाता है, जिसे सुनकर वाद विवाद प्रतिवाद इतना बढ़ जाता है कि, हत्या तक हो जाती है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इसे नकारात्मक पहलू से देखा जाता है, जबकि इनका सकारात्मक पहलू यह है कि गधा बहुत भारी बोझ उठाकर मेहनत के प्रति समर्पित रहता है,सांड खेतियों में हल जोतने क़ी मेहनत क़ा काम करता है, इस तरह हर ऐसे अपमान क़े सूचक बनें इन प्राणियों का हमारे जीवन को सुचारू रूप से चलाने में कुछ ना कुछ योगदान होता है, फिर भी हम उन्हें हास्यप्रद व अपमान सूचक शब्दों से व्यक्त करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते, आज हम इस विषय पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 5 अगस्त 2025 को हम राष्ट्रीय कुत्ते की तरह काम करने (वर्क लाइक ए डॉग डे)के दिवस के रूप में मनाया जा रहा है जो अमेरिका सहित पश्चिम भारत सहित दक्षिण एशिया इत्यादि देश में मनाया जाता है, इस दिन का उद्देश्य उन सभी लोगों को सम्मान देना है जो इतना कठिन परिश्रम करते हैं,अपनी वफादारी व जिम्मेदारियों को निष्ठा व अनुशासन के साथ निभाते हैं और मानव समाज की प्रगति में योगदान देते हैं। इसमें दो बातें महत्वपूर्ण है, (1) यह दिन एक प्रतीक है-ऐसे श्रमिकों, कर्मचारियों व्यापारियों और हर उस व्यक्ति के लिए जो ‘कुत्ते की तरह’ अथक, निःस्वार्थ और समर्पण भाव से कार्य करतें है। (2) पशुओं में कुत्ता वह प्राणी है जिसे सबसे अधिक वफादार, मेहनती और संरक्षक माना गया है। वह केवल आदेश मानने वाला प्राणी नहीं, बल्कि कई मामलों में नेतृत्वकर्ता, खोजी, सहायक और संकटमोचक भी होता है।पुलिस डॉग्स, थैरेपी डॉग्स, फॉर्म डॉग्स, रेस्क्यू डॉग्स और गाइड डॉग्स-हर क्षेत्र में इनकी मेहनत असाधारण है। ये विशेष प्रशिक्षित कुत्ते दिन-रात काम करते हैं, बिना शिकायत किए, बिना थके। यही भावना इस दिवस के पीछे की प्रेरणा है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग सेआर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, वर्क लाइक ए डॉग डे,5 अगस्त 2025, वफादारी व समर्पण भाव से मेहनत करने वालों को सैल्यूट।
साथियों बात अगर हम मेहनतकश लोगों को सैल्यूट करने की करें तो,इस दिवस की एक और प्रासंगिकता है-यह आज की अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक और लक्ष्य-केंद्रित वर्क कल्चर की झलक देता है, ये सब हमें लगातार ‘कुत्ते की तरह’ काम करने के लिए मजबूत करता हैं। लेकिन यह कब प्रगति का संकेत बनता है और कब शोषण, इसपर विचार करना भी उतना ही आवश्यक है।जिसमें इंसान को मशीन की तरह 24/7 काम करने की अपेक्षा की जाती है।इस दिन का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है जो अपने कार्यस्थल पर या जीवन में साधारण नहीं, बल्कि असाधारण मेहनत करते हैं। इसमें शामिल हैं: (1) कृषक जो सुबह 4 बजे खेतों में पहुंचते हैं।(2)डॉक्टर और नर्स जो महामारी या आपदा के दौरान 18-18 घंटे की शिफ्ट करते हैं। (3) स्वच्छता कर्मी जो शहरों को साफ -सुथरा बनाए रखने में जुटे रहते हैं।(4) महिलाएँ, जो घर और ऑफिस दोनों में ‘वर्क लाइक अ डॉग’ वाली भूमिका निभाती हैं। (5) वर्क फ्रॉम होम, ओवरटाइम, स्टार्टअप कल्चर, करियर रेस चुनौतीपूर्ण कार्य।
साथियों बात अगर हम मेहनत करने की करें तो,जब हम मेहनत की बात करते हैं, तब हमें ये भी देखना होगा कि हर व्यक्ति को उसके काम का पूरा मुआवज़ा मिले, और उसकी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक सेहत का ध्यान रखा जाए। (1) वर्कप्लेस वेलनेस प्रोग्राम्स (2) मेंटल हेल्थ अवेयरनेस (3) बर्नआउट की पहचान और राहत (4) वर्क- लाइफ बैलेंस के प्रयास ये सभी ज़रूरी हैं ताकि मेहनत करने वाले थकें नहीं, टूटें नहीं, बल्कि प्रेरित और संतुलित रहें। हम देखते हैं कि आज जब चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स, रोबोट, ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर इंसानी कामों को बदल रहे हैं,तब “कुत्ते की तरह काम करना”अब मेहनत नहीं बल्कि स्मार्ट वर्क की ओर मुड़ता प्रतीत हो रहा है। लेकिन इस बदलाव में भी वो भावना, वो ऊर्जा, वो लगन जो इंसान का मूल गुण है,वह अमूल्य है। एआई कभी वफादारी, नैतिकता और जुनून नहीं ला सकता, जो एक इंसानी श्रमिक में होता है।
साथियों बात अगर हम दुनियाँ के भविष्य,बच्चों व युवाओं को क़ाम का मूल्य सिख़ाने की करें तो,वर्क लाइक ए डॉग डे केवल वयस्कों के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को श्रम के मूल्य और गरिमा सिखाने का एक सुनहरा अवसर है। (1) उन्हें छोटे-छोटे कार्य सौंपें। (2) घर के कामों में भागीदार बनाएं (3) उन्हें यह बताएं कि मेहनत केवल पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि आत्मनिर्माण के लिए भी है।परंतु कुछ आलोचक कहते हैं कि “कुत्ते की तरह काम करना” इंसानों के आत्म- सम्मान के विरुद्ध है। इसमें मनुष्यता की उपेक्षा होती है। यह दलील तब सार्थक लगती है जब कार्य की मात्रा मनुष्य की सीमा से अधिक हो जाती है।इसलिए इस दिन को मनाते हुए हमें मेहनत और शोषण के बीच की महीन रेखा को पहचानना ज़रूरीहै। 5 अगस्त का नेशनल वर्कलाइक ए डॉग डे कोई तुच्छ मुहावरा नहीं बल्कि मेहनत करने वालों की आत्मा को श्रद्धांजलि है।यहदिन हमें याद दिलाता है कि समाज उन्हीं के कंधों पर खड़ा है जो लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।हर पेशा-चाहे वह सीईओ हो या सड़क पर सफाई करने वाला-मेहनत का सम्मान बराबर चाहता है।सबसे महत्वपूर्ण बात: मेहनत करना गौरव की बात है, लेकिन अपने स्वास्थ्य, संतुलन और आत्म- सम्मान केसाथ।”कुत्ते की तरह काम करने का मतलब सिर्फ पसीना बहाना नहीं है, बल्कि यह अपने काम से प्रेम करना, उसे जिम्मेदारी से निभाना,और दुनियाँ को यह दिखाना है कि ईमानदारी और मेहनत कभी असफल नहीं होती।”
साथियों बात अगर हम वर्क लाइक ए डॉग डे मनाने की करें तो, अपने दिन का सर्वोत्तम प्रदर्शन करें, (1) इस दिन अपने सभी कार्यों को सर्वोत्तम गुणवत्ता और पूर्ण समर्पण से करें। (2) अपने साथियों की प्रशंसा करें- टीम में जो सबसे मेहनती हैं, उन्हें धन्यवाद कहें या एक छोटी सी प्रशंसा दें। (3) अपने काम के प्रति खुद को प्रेरित करें-यह दिन आत्मनिरीक्षण का भी है। (4) किसी सेवा कुत्ते की कहानी साझा करें-जानवरों से प्रेरणा लेना भी इस दिन का एक भावनात्मक पहलू है। (5) आराम भी जरूरी है-ध्यान रखें कि संतुलन बनाए रखना भी इस दिवस की शिक्षा है।
साथियों बात अगर हम इस दिवस के इतिहास की करें तो,”वर्क लाइक ए डॉग डे” की सटीक ऐतिहासिक उत्पत्ति अस्पष्ट है, लेकिन इसका मूल अमेरिका में माने जाते हैं। यह दिन उन मेहनतकश अमेरिकियों की प्रशंसा और मान्यता के लिए मनाया गया,जो रोज़गार और जीवन के तनावों के बावजूद पूरे मनोयोग से कार्य करते हैं।इसे अनौपचारिक छुट्टी के तौर पर मान्यता मिली,और सोशल मीडिया ने इसे लोकप्रिय बनाया।धीरे-धीरे यह दिन दुनियाँ भर के श्रमिकों के लिए एक प्रेरणा बन गया।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि साहब!मेरा नाम हमेशा अपमान के पर्याय के रूप में लेते हो!आज मेरे नाम पर वैश्विक वफ़ादारी, समर्पण, मेहनतकश और प्रतिबद्धता का दिवस है,राष्ट्रीय कुत्ते की तरह काम करने का दिवस(वर्क लाईक ए डॉग डे) 5 अगस्त 2025 – वफादारी से मेहनत करने वालों को सैल्यूट!5अगस्त 2025 क़ा दिन ऐसे श्रमिकों कर्मचारीयों व्यापारियों और हर उ7स व्यक्तियों के लिए है, जो कुत्ते की तरह वफादारी, निस्वार्थ और समर्पण भाव से कार्य करते हैं।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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