मृतक बालिकाएं के परिजनों के साथ कई घरों में नहीं जले चूल्हे पूरा गांव ही सदमे में
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) । थाना नवाबगंज के ग्राम सभा सतिजोर में एक ही परिवार की चार बालिकाओं की सती नाले के तालाब में डूबकर मौत के दूसरे दिन भी सती जोर गांव में सन्नाटा पसरा रहा परिवार व गांव में इस घटना से आस पास के घरों में नहीं जले चूल्हे पीड़ित परिवार अभी भी सदमे में। बताते चलें कि मंगलवार को नवाबगंज थाना क्षेत्र के सती जोर गांव में चार बालिकाएं सती नाले में कमल का फूल तोड़ने के लिये गई हुई थी जिनकी सती नाले के समीप तालाब में डूबकर चार बालिकाओं की मौत हो गयी थी जिसमे शायबा, सामिया,शरीकुल खातून, महक थी। जिससे गांव में कोहराम मच गया था और सभी बालिकाओं का पोस्टमार्टम के बाद रात दस बजे के करीब स्थानीय कब्रिस्तान में गमगीन माहौल में दफन कर दिया गया था ,लेकिन गांव में हिन्दू सदमे में तो मुस्लिम समाज मे मातम का माहौल है । जहां पीड़ित परिवार में भी चूल्हे नहीं जले वहीं आस पास के पड़ोसियों के घर में चूल्हा नहीं जला। परिवार व गांव के लोग भी सदमे में हैं। एक ही परिवार के चार शवों को देखकर हर किसी के दिल से आह निकल रही थी। वहीं मृतक शायबा के पिता मेराज खां जो काफी निर्धन और गरीब है इनका टीन सेड का मकान और इसी में गुजारा करते हैं।बेटी की मौत से सदमे में हैं।
मृतक सामिया के पिता इसरत खा भी मेहनत मजदूरी करते हैं।जो काफी सदमे में हैं भी उनके घर में चूल्हा नहीं जला है और गांव में अब भी लोग सदमे में हैं वही इस घटना में बची बालिका जाकरून भी काफी सदमे में हैं। उसने बताया कि चारों को डूबता देख उसके सामने अंधेरा छा गया जब उसे होश आया तो वह गांव की तरफ दौड़ी लोगों को पुकारा तब तक देर हो चुकी थी।
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