
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) सलेमपुर के सोहनाग धाम में चल रहे शिव पुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास ब्रजेश मणि ने बताया कि परमपिता ब्रह्म के कहने पर दक्ष प्रजापति के द्वारा मैथुनी सृष्टि प्रारंभ हुई। जिसमें नारद जी ने दक्ष पुत्रों को संन्यासी बना दिया। क्रोधित होकर दक्ष ने यह श्राप दिया कि हे नारद तुम्हारा पद एक जगह स्थिर नहीं रहेगा, तभी से नारद जी इस सृष्टि में लागातार भ्रमण करते रहते हैं। पुनः ब्रह्म जी के आदेश पर दक्ष के यहाँ साठ कन्याओं का जन्म हुआ।
दक्ष ने अपनी दस कन्याएँ धर्म को दीं, तेरह कन्याएँ कश्यप मुनि को दीं और सत्ताईस कन्याओं का विवाह चन्द्रमा के साथ कर दिया। अंगिरा तथा कृशाश्व को दो – दो कन्याएँ एवं शेष चार कन्याओं का अरिष्टनेमि के साथ ब्याही गईं। दक्ष की सबसे छोटी पुत्री सति जी हुईं जो साक्षात आदिशक्ति जगदंबा ही थी। जन्म के पुर्व ही मईया ने यह शर्त रक्खी कि अगर भूल से भी कन्य का अपमान हुआ तो मै अपने शरीर का परित्याग कर दुँगी।
कालान्तर में माता सति का विवाह भगवान भोले नाथ के साथ हुआ। तथा दक्ष प्रजापति के अपमान पर मइया सति ने योगाग्नि में अपने शरीर का परित्याग किया और दक्ष के अभिमान को नष्ट किया। भगवान भोलेनाथ की कृपा से पुनः दक्ष को जीवनदान मिला और बकरे के मुखवाले स्वरूप से ही शिव स्तुति करके दक्ष ने भगवान की भक्ति को स्वीकार किया।
उक्त अवसर बृजेश कुशवाहा,अजय दूबे वत्स,मनीष मौर्य, रामनयन सिंह,सोनू पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
