शरद पवार–अजित पवार की नजदीकी पर सियासी हलचल तेज

नगर निकाय चुनावों में सियासी संकेत: फडणवीस बोले— एनसीपी के दोनों गुटों के साथ आने से इनकार नहीं


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार और अजित पवार गुटों के भविष्य में एक साथ आने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगमों में दोनों गुटों के बीच मौजूदा तालमेल को केवल स्थानीय और सीमित व्यवस्था करार दिया है।

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15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों के प्रचार के अंतिम दिन पुणे में मीडिया से बातचीत करते हुए फडणवीस ने स्पष्ट किया कि एनसीपी के दोनों धड़े ने औपचारिक रूप से कोई विलय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कुछ नगर निगमों में साथ चुनाव लड़ना यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों को एकजुट रखने का प्रयास कर रहे हैं, न कि यह किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महायुति गठबंधन के दलों के बीच यह सहमति बनी थी कि चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से बचा जाएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) को लेकर अजित पवार द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उपमुख्यमंत्री ने “सौहार्दपूर्ण मुकाबले” की भावना का पालन नहीं किया।

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दूसरी ओर, पुणे जिले के पालक मंत्री अजित पवार ने स्थानीय मुद्दों को उठाते हुए टैंकर माफिया और पीसीएमसी में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि निगम के विभिन्न विभागों पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये के बिल लंबित हैं और लागत बढ़ोतरी के कई उदाहरण सामने आए हैं, जिससे आम नागरिकों में नाराजगी है।

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इन बयानों के बीच यह साफ है कि नगर निकाय चुनाव केवल स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति के संकेत भी दे रहे हैं।

Editor CP pandey

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