• डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
दर्पण का काम ही है सबको सबकी
सूरत दिखाना चाहे अच्छी हो या नहीं,
कितना निरपेक्ष है दर्पण का सिद्धांत,
कितना लाजवाब है दर्पण का किरदार।
दर्पण स्वागत तो सभी का करता है,
परंतु किसी का संचित नहीं करता है,
टूटकर बिखर भी जाये तो भी जितने
चेहरे सामने हों सबकी सूरत दिखाता है।
जिस तरह से वृक्षों पर फल आने
से वे झुकते हैं यानी विनम्र बनते हैं,
पानी से भरे बादल आकाश से नीचे
ही आते हैं, अच्छे लोग ऐसे ही होते हैं।
वह समृद्धि से घमण्डी नहीं बनते हैं,
आत्मविश्वास व परोपकारी का रूप
धारण करके संसार का भला करते हैं,
सदाचारियों के स्वभाव ऐसे ही होते हैं।
आत्मविश्वास जीवन का सबसे
सुदृढ़ व खूबसूरत गुण होता है,
जो सुबह से लेकर पूरे दिन तक
जीवन खूबसूरत बनाये रखता है।
इसी आत्मविश्वास से चाणक्य ने
स्वयं राजा न बन श्री चंद्रगुप्तमौर्य
को मगध का सम्राट बनाया था,
व राजकाज का संचालन कराया था।
क्योंकि एक राजा सामाजिक व
पारिवारिक जीवन वाला सम्पन्न,
समृद्धिशाली व्यक्ति होना चाहिए,
जिसे सभी के दुःख सुख की समझ हो।
ऐसा ही व्यक्ति प्रजा के साथ उचित व
सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार कर सकता है,
सन्यासी जीवन व्यतीत करने वाला
सांसारिकता तो समझ नहीं सकता है।
जिस राजा की पत्नी व संतान ही न हों,
भाई, बहन व परिवार के सदस्य ही न हों,
आदित्य परिवार व अपने राज्य की प्रजा
का दुःख दर्द कैसे समझ सकता है।
महाराजगंज (राष्ट्र की परंपरा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। रेल महाप्रबंधक उदय बोरवडकर ने मंगलवार को घुघली रेलवे स्टेशन का…
9 पदों पर 29 प्रत्याशी मैदान में, 14 फरवरी को सुबह 9 से 3 बजे…
दो बसों में सवार दर्जनों यात्री घायल आधे घंटे तक ठप रहा यातायात गोरखपुर(राष्ट्र क़ी…
एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने की राह की मजबूत, क्षेत्र में खुशी की लहर…
एक लाख सवर्णों का हस्ताक्षर मांग पत्र सौपेगा ब्राह्मण महासभा बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)मंगलवार को बरहज…