जिले के 37 मदरसों के 181 विद्यार्थियों से होगी छात्रवृत्ति की वसूली

मदरसा संचालकों में हड़कंप

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक योजना अल्पसंख्यक छात्र छात्राओं की छात्रवृत्ति योजना भी रही है।
इस योजना में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहराई तक पहुंच चुकी हैं कि जिसे उखाड़ पाना अब काफ़ी मुश्किल हो गया है। इस में आला अधिकारियों की संलिप्तता होने के कारण ही छात्र वृत्ति घोटाले बाजों का मनोबल काफ़ी बढ़ा हुआ है।
जनपद में इस प्रकार के छात्रवृत्ति घोटाला करने वाले शिक्षा माफियाओं ने एक रैकेट तैयार कर रखा है। अल्पसंख्यक विभाग की सांठगांठ से सरकारी धन को धड़ल्ले से चूना लगाया जा रहा है।
अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही इस प्रकार के छात्रवृत्ति घोटाले लगातार किए जा रहे हैं।
तथ्य छिपाकर निर्धारित मानकों का पालन न करके चहेतों को हास्टल और अधिक शुल्क का आवेदनों में उल्लेख करके छात्र वृत्ति की ज्यादा रकम वसूलने की साज़िश संस्था संचालकों द्वारा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद के कुल 37 मदरसा और इंटर कॉलेज संचालकों ने वर्ष 2019-20 में तथ्य छिपाकर कक्षा 1 से 5 के कुल 181 छात्र-छात्राओं के शुल्क निर्धारित अनुमन्यता से अधिक बढ़ाकर फारवर्ड कर दिए। परिणामस्वरूप उक्त सभी छात्र-छात्राओं के खाते में 1000 के बजाय 5000 और इससे भी अधिक छात्रवृत्ति की धनराशि खातों में अंतरित हो गई है। महालेखाकार द्वारा जब वर्ष 2019-20 के छात्रवृत्ति आवेदनों का जब आडिट किया गया तो इन मदरसा और इंटर कालेज संचालकों के चतुराई की पोल खुल गई।
पूरे मामले को गंभीरता से लेकर निदेशिका अल्पसंख्यक कल्याण उत्तर प्रदेश ने ज़िला अल्पसंख्यक अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्रा को ऐसे मदरसे और इंटर कॉलेज में अध्ययनरत छात्र छात्राओं की सूची संलग्न कर सभी से छात्रवृत्ति वसूली का सख़्त फरमान जारी किया है।
ज़िला अल्पसंख्यक अधिकारी ने निदेशक के निर्देशानुक्रम में जनपद के कुल 37 मदरसा प्रधाचार्यो को पत्र जारी कर मानक से अधिक लाभ लेने वाले 181 छात्र- छात्राओं से 860928 रु. छात्रवृत्ति रकम वसूलकर आख्या तलब किया है।
पूरे मामले पर गहनता से विचार किया जाए तो कहीं न कहीं ज़िले का अल्पसंख्यक दफ्तर भी इस खेल में शामिल है।
चूंकि मदरसों या इंटर कालेजों से सभी आवेदन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को फारवर्ड किया जाते हैं। ऐसे में ग़लत आवेदनों पर अल्पसंख्यक अधिकारी और इनके कर्मचारी की नज़र क्यों नहीं पड़ी?
पूरे मामले में दोषी प्रधानचार्य और लिपिक के साथ-साथ भागीदार बने अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर भी विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रवृत्ति आवेदनों में गड़बड़ी करने वाले मदरसा तनवीरुल इस्लाम अमरडोभा,आदर्श यू.एम.वी.भदाह,मदरसा अनवारे हक़ दोकड़ा,मदरसा अफसाना परवीन लखनोहर, नाथनगर,मदरसा अरबिया कैफ पौली, मदरसा लेडुआ महुआ बखिरा,मदरसा सोहरुल मड़हा राजा,मदरसा तालीमुल इस्लाम निस्वां महुली, मरियम मेमोरियल देहली पब्लिक स्कूल महुली आदि मदरसे शामिल हैं।

rkpNavneet Mishra

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