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योग बंधन–2026 में भारत-थाईलैंड के विद्वानों ने साझा किए योग के वैज्ञानिक आयाम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय तथा चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय, बैंकॉक (थाईलैंड) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला “योग बंधन–2026” का चौथा दिवस वर्चुअल माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के संरक्षण तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में किया गया। इसका उद्देश्य योग के माध्यम से वैश्विक सद्भाव, समग्र स्वास्थ्य तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
उद्घाटन संबोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने योग को भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य अंग बताते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन एवं वैश्विक कल्याण का सशक्त मार्ग है। उन्होंने कहा कि “योग बंधन” आज एक वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के लोग योग से जुड़ रहे हैं और इसके लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यह पहल योग के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक महत्व को स्थापित करने के साथ-साथ विश्व स्तर पर स्वास्थ्य, शांति और सौहार्द के मूल्यों को भी सुदृढ़ कर रही है।
उन्होंने कहा कि योग भौगोलिक सीमाओं, भाषाओं और सांस्कृतिक विविधताओं से परे जाकर मानवता को जोड़ने का कार्य करता है। साथ ही भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं को वैश्विक मंचों पर प्रतिष्ठित करने के लिए कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन की सराहना की। उनके अनुसार ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम शैक्षणिक सहयोग के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय मैत्री को भी मजबूत करते हैं।
मुख्य व्याख्यान काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. बिनायक कुमार दुबे ने “योग का विज्ञान” विषय पर दिया। उन्होंने योग के वैज्ञानिक आधारों तथा उसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभावों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न अनेक चुनौतियों का प्रभावी समाधान योग में निहित है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में भारत और थाईलैंड के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा योग साधकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय के प्रो. चंचाई बूनला ने फ्रांस से कार्यक्रम में सहभागिता की। चिकित्सा संकाय के विद्यार्थियों सहित भारत की ओर से मयराम यादव, दीपचंद, शिवांगी तथा राजीव रंजन समेत अनेक प्रतिभागियों ने योग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की और वैश्विक स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के आयोजन में प्रो. चंचाई बूनला का विशेष सहयोग रहा। इसकी रूपरेखा, समन्वय एवं संचालन अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता तथा शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. विजय चहल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। यह आयोजन भारत और थाईलैंड के मध्य शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

rkpNavneet Mishra

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