Sunday, January 25, 2026
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जीवन-साफल्य के लिए सत्संग अनिवार्य: अद्वैत शिवशक्ति परमधाम में गीता-ज्ञानयज्ञ जारी

सिकन्दरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। अद्वैत शिवशक्ति परमधाम परिसर, इहाँ बिहरा में ब्रह्मलीन संत-सद्गुरु पूज्य स्वामी ईश्वरदास ब्रह्मचारी ‘मौनी बाबा’ की प्रेरणा से संचालित परम्परागत गीता-ज्ञानयज्ञ और वैदिक यज्ञ इन दिनों पूरे श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह के साथ जारी है। सोमवार के सान्ध्य सत्र में ज्ञान, साधना और उपासना का अद्भुत संगम देखने को मिला।

यज्ञ के दौरान श्री गोरखदास जी महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के मंत्रों द्वारा आहुति देते हुए गीता-माहात्म्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अर्जुन के मन में उत्पन्न संशय, उसके कारण और उसके समाधान की गीता में वर्णित दिव्य पद्धति का सरल और सारगर्भित विवेचन किया। उन्होंने कहा कि गीता केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का दिव्य मार्गदर्शन है, जो मनुष्य को भ्रम, भय और कर्तव्य-विमुखता से उबारकर सही दिशा दिखाती है।

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इसके पूर्व मध्य प्रदेश के सिहोर से पधारे संत वृजविहारीदास जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम का चरित भारतीय संस्कृति की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य भीड़ नहीं, बल्कि मन की शुद्धि और आचरण की पवित्रता है। यदि श्रोता एकाग्रचित्त हों, तो कथा स्वयं जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

सत्संग के महत्त्व पर उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के भीतर गुणात्मक बदलाव, अहंकार का क्षय और ईश्वर के प्रति भावनात्मक निकटता स्थापित करता है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहे जितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, कथा-सत्संग के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।

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सत्र का समापन भक्तों द्वारा पुष्प अर्पण और शांति मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। पूरे दिन परिसर में भक्ति, दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का उल्लासपूर्ण माहौल बना रहा।

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