गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती पूजन का श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में वाक् देवी सरस्वती का पारंपरिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
पूजन कार्य संस्कृत विभाग से ज्योतिष एवं कर्मकांड में डिप्लोमा प्राप्त आचार्य अंकित कुमार शुक्ल द्वारा संपन्न कराया गया। विभाग की ओर से प्रो. दिग्विजय नाथ यजमान के रूप में उपस्थित रहे। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मुख्य यजमान की भूमिका निभाते हुए विधिवत पूजन एवं हवन संपन्न कराया।
इस अवसर पर विभागीय गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने वाले विद्यार्थियों को कुलपति द्वारा पुरस्कृत किया गया। साथ ही चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को वस्त्र वितरण भी किया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने वाक् देवी की पूजन परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राचीन इतिहास विभाग में सरस्वती पूजन की परंपरा विगत 46 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। उन्होंने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग बताया।
प्रो. राजवन्त राव ने कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान, ऋतु परिवर्तन एवं कृषि सत्र से जुड़ा पर्व है। उन्होंने कहा कि वाक् देवी सरस्वती ज्ञान, प्रकृति और सृजन का सुंदर समन्वय स्थापित करती हैं।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने वाक् देवी की वंदना करते हुए विभाग, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों से सृजनशील बनने का आह्वान किया तथा विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई रंगोली, सजावट एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पद्मजा सिंह ने किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा शिव तांडव नृत्य, भजन एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
इसके अतिरिक्त जंतु विज्ञान विभाग एवं अलकनंदा छात्रावास में भी कुलपति प्रो. पूनम टंडन की उपस्थिति में सरस्वती पूजन का विधिवत आयोजन किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में धूमधाम से हुआ सरस्वती पूजन
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