सागर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी में आयोजित होने वाला 400 साल पुराना श्री देव खंडेराव महाराज का अग्नि मेला आज से विधिवत शुरू हो गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने अग्निकुंड और मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
यह 10 दिवसीय मेला 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलेगा।
आस्था और साहस का अनोखा उत्सव
अग्नि मेला अपनी अनूठी परंपरा के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, जहां श्रद्धालु नंगे पैर धधकते अंगारों पर चलते हैं।
इस वर्ष करीब 1300 भक्त अग्निकुंड की ‘आस्था दौड़’ में शामिल होंगे। मान्यता है कि सच्चे विश्वास के साथ अग्निकुंड पार करने वाले को कोई चोट नहीं लगती।
स्थानीय लोगों का कहना है—
“आस्था के साथ कदम बढ़ाओ तो जलते अंगारे भी फूलों जैसा स्पर्श देते हैं।”
इस वर्ष मेले में 135 अग्निभट्टियां तैयार की गई हैं। प्रतिदिन 100 से 125 भक्त अग्निकुंड से गुजरेंगे।
देवरी का प्राचीन मंदिर—मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान
सागर से 65 किमी और नरसिंहपुर से 75 किमी दूरी पर स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगहन माह में लगने वाला यह मेला चंपा षष्ठी से पूर्णिमा तक आयोजित होता है।
मंदिर के गर्भगृह में स्थित प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, नंदी प्रतिमा और विशाल बावड़ी इसकी प्राचीनता का प्रमाण हैं।
देव श्री खंडेराव: भगवान शिव का अवतार
माना जाता है कि 15–16वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर में भगवान श्री खंडेराव शिव के अवतार माने जाते हैं। यहां खंडेराव महाराज घोड़े पर सवार और आधे रूप में माता पार्वती के साथ विराजमान हैं।
राजा रसाल के सपने से शुरू हुई थी अग्नि परंपरा
लोककथा के अनुसार, देवरी के शासक राजा रसाल जाजोरी ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। एक बार उनका पुत्र गंभीर रूप से बीमार हो गया। राजा ने देव श्री खंडेराव से मनोकामना मांगी।
मान्यता है कि सपने में देव ने राजा को दर्शन देकर कहा—
“अग्निकुंड से नंगे पैर निकलोगे तो पुत्र स्वस्थ हो जाएगा।”
राजा ने वैसा ही किया और उनका पुत्र ठीक हो गया।
तभी से यह परंपरा प्रतिवर्ष श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है।
पूरा क्षेत्र आस्था के रंग में रंगा
मेले की तैयारियां कई दिनों से जारी थीं, जो अब पूरी हो चुकी हैं। देवरी और आसपास का क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक उत्साह, भजन-कीर्तन और देव खंडेराव महाराज के जयघोष से गूंज रहा है।
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