पूर्वांचल की धरती पर विज्ञान का उत्सव! दूसरे दिन 10 रॉकेट लॉन्च, बच्चों को मोहित कर गया रोबोटिक डॉग
इन–स्पेस कंपटीशन 2024–25: दो दिनों में 14 कैनसैट लॉन्च, आज आएंगे चेयरमैन पवन गोयनका
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर भारत के इस पहले इन–स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन के दूसरे दिन मंगलवार को जीरो बंधा स्थित जंगलपट्टी का आसमान फिर से विज्ञान के रंगों से भर गया। देशभर से आए युवा वैज्ञानिकों ने इस दिन भी कमाल दिखाया। सुबह से शाम तक चली गतिविधियों के बीच कुल 10 रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए, जिनसे जुड़े सभी पेलोड और कैनसैट सेटेलाइट्स पैराशूट की मदद से सुरक्षित नीचे उतरे।
इन–स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने सभी लॉन्च को सौ प्रतिशत सफल बताया और कहा कि छात्रों की सटीकता और तकनीकी दक्षता उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर रही।
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🌅 सुबह से जोश, शाम तक उड़ान
सुबह नौ बजे से ही सभी प्रतिभागी टीमें अपने-अपने कैनसैट को तैयार करने में जुट गई थीं। कोई पेलोड सेंसर की जांच कर रहा था तो कोई सॉफ्टवेयर कैलिब्रेशन में व्यस्त था। दोपहर 12:36 बजे जैसे ही पहला रॉकेट आसमान की ओर रवाना हुआ, पिपराघाट क्षेत्र गूंज उठा। इसके बाद लगभग हर पाँच से सात मिनट के अंतराल पर चार और कैनसैट लॉन्च किए गए।
लंच के बाद शाम पाँच बजे से लांचिंग दोबारा शुरू हुई और हर दो से तीन मिनट में रॉकेट हवा में ऊँचा उठता गया। सभी 10 लॉन्च पूरी तरह सफल रहे और रिकवरी टीम ने सभी पेलोड्स को सटीक ट्रैकिंग के बाद सुरक्षित हासिल कर लिया।
🇮🇳 लोगों का उत्साह और ‘जय विज्ञान’ के नारे
27 और 28 अक्टूबर को दो दिनों में अब तक कुल 14 कैनसैट लॉन्च हो चुके हैं। मंगलवार को आम लोगों का उत्साह पहले दिन से कहीं अधिक था। आरक्षित क्षेत्र से एक किलोमीटर दूर बनी दर्शक दीर्घा में दूर–दराज के गांवों से आए लोग जुटे थे।
हर रॉकेट की उड़ान के साथ माहौल रोमांचक होता गया। जैसे ही पैराशूट के सहारे कैनसैट नीचे उतरते, लोग ‘भारत माता की जय, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के नारे लगाने लगते। विज्ञान और देशभक्ति का ऐसा संगम शायद पहली बार देखा गया।
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👩🔬 स्थानीय छात्रों में बड़ी जिज्ञासा
आज स्थानीय जगदीश पब्लिक स्कूल के 42 छात्र–छात्राओं ने भी वर्किंग और हैबिटेट एरिया का भ्रमण किया। इन बच्चों ने प्रतिभागी छात्रों से बातचीत की और जाना कि कैनसैट कैसे काम करता है। छात्रों ने बताया कि वे भी आगे चलकर वैज्ञानिक बनना चाहते हैं।
स्कूल के प्रबंधक और प्रिंसिपल ने इस विजिट को बच्चों के लिए “जीवन बदल देने वाला अनुभव” बताया।
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🤖 रोबोटिक डॉग बना आकर्षण का केंद्र
वर्किंग एरिया में आज का सबसे बड़ा आकर्षण रहा रोबोटिक डॉग, जिसे गोरखपुर के केआईपीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों ने तैयार किया। यह डॉग लोगों से हाथ मिला रहा था, जंप कर रहा था और गानों पर नाचते हुए बच्चों का मनोरंजन कर रहा था।
टीम के छात्र अंकित प्रताप सिंह ने बताया, “हम इस रोबोटिक डॉग को वॉयस कमांड से संचालित करने पर रिसर्च कर रहे हैं। फिलहाल यह रिमोट से चलता है, लेकिन हमारा लक्ष्य है कि इसमें मिलिट्री डॉग जैसे सभी कमांड्स फिट किए जाएं।”
इस नवाचार को देखकर सभी दर्शक बच्चों में तकनीकी जिज्ञासा और उत्साह साफ झलक रहा था।
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🚀 आगे आने वाले दिन और भी खास
इन–स्पेस के डायरेक्टर डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि “इस प्रतियोगिता से छात्रों में टीमवर्क और नवाचार की भावना विकसित हो रही है। यह भविष्य के वैज्ञानिकों की प्रयोगशाला है।”
उन्होंने बताया कि बुधवार को इन–स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचेंगे और प्रतिभागी छात्रों से संवाद करेंगे। इसके बाद 30 अक्टूबर (गुरुवार) को भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का आगमन होगा, जो युवाओं से अपने अनुभव साझा करेंगे।
देवरिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद शशांक मणि ने कहा कि “पूर्वांचल की धरती पर जारी यह ‘अंतरिक्ष महाकुंभ’ हर दिन नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।”
अब सबकी निगाहें बुधवार पर हैं, जब इस मंच से भारत के स्पेस मिशन के शीर्ष नेतृत्व का संदेश युवाओं तक पहुंचेगा।
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