ऋषि पंचमी, शनि उपासना और हरतालिका तीज: आस्था, संयम और संकल्प की त्रिवेणी

सप्तऋषियों की आराधना से शिव-पार्वती की तपस्या तक, जानें इन पर्वों का धार्मिक महत्व

लेखक: पंडित सुधीर तिवारी

सनातन धर्म की परंपरा में व्रत और पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, आत्मशुद्धि, श्रद्धा और सदाचार का संदेश देने वाले अवसर भी माने जाते हैं। भाद्रपद मास में आने वाले ऋषि पंचमी और हरतालिका तीज जैसे पर्व भारतीय संस्कृति में तप, त्याग, नारी शक्ति, गुरु-परंपरा और आध्यात्मिक अनुशासन की भावना को मजबूत करते हैं। इन पर्वों के साथ जुड़ी धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति को अपने आचरण पर विचार करने और जीवन में सकारात्मक संकल्प लेने की प्रेरणा देती हैं।
ऋषि पंचमी 2026: सप्तऋषियों के स्मरण और आत्मशुद्धि का पर्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में ऋषि पंचमी का व्रत मंगलवार, 15 सितंबर को रखा जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन सप्तऋषियों का पूजन और स्मरण किया जाता है।
पंचमी तिथि प्रारंभ: 15 सितंबर 2026, सुबह 07:44 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 16 सितंबर 2026, सुबह 08:59 बजे

सप्तऋषि पूजा का शुभ मुहूर्त: 15 सितंबर 2026, सुबह 11:07 बजे से दोपहर 01:33 बजे तक
ऋषि पंचमी को आत्मशुद्धि और प्रायश्चित से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि व्यक्ति इस दिन व्रत, पूजा, संयम और सदाचार के माध्यम से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना करता है तथा जीवन में अच्छे आचरण का संकल्प लेता है।
ऋषियों को भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार माना गया है। उन्होंने समाज को धर्म, ज्ञान, तप, सत्य और सदाचार की राह दिखाई। इसलिए ऋषि पंचमी पर उनका स्मरण केवल पूजा तक सीमित न रहकर उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश भी देता है।
कौन हैं ऋषि पंचमी के सप्तऋषि?
ऋषि पंचमी पर परंपरागत रूप से इन सप्तऋषियों का स्मरण और पूजन किया जाता है—
महर्षि कश्यप
महर्षि अत्रि
महर्षि भारद्वाज
महर्षि विश्वामित्र
महर्षि गौतम
महर्षि जमदग्नि
महर्षि वशिष्ठ
पूजा के दौरान श्रद्धालु सप्तऋषियों का ध्यान करते हुए उनके नाम-मंत्रों का जाप कर सकते हैं—
ॐ कश्यपाय नमः।
ॐ अत्रये नमः।
ॐ भारद्वाजाय नमः।
ॐ विश्वामित्राय नमः।
ॐ गौतमाय नमः।
ॐ जमदग्नये नमः।
ॐ वशिष्ठाय नमः।
ॐ ऋषिभ्यो नमः।
धार्मिक परंपरा में इस दिन सात्विक भोजन, दान, सेवा, संयम और सदाचार को विशेष महत्व दिया जाता है।
शनिवार और शनिदेव की उपासना
सनातन परंपरा में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिषीय परंपरा में शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन, परिश्रम और कर्मफल से संबंधित ग्रह माना गया है।
कई धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में शनिवार को सरसों के तेल का दान शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार शनिवार की सुबह स्नान के बाद साफ पात्र में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखने और बाद में उस तेल का दान करने की परंपरा को ‘छाया दान’ कहा जाता है।
इसी प्रकार शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाने तथा जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने की परंपरा भी अनेक स्थानों पर प्रचलित है। काला तिल, उड़द, लोहा और सरसों का तेल भी शनि से संबंधित पारंपरिक वस्तुओं में माने जाते हैं।
हालांकि इन उपायों को धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए। इनके प्रभाव के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
हरतालिका तीज: शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और तपस्या का पर्व
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। धार्मिक परंपरा में इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि अनेक महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य एवं मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से व्रत रखती हैं।
माता पार्वती की कठोर तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने वन में अन्न और जल का त्याग कर रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रात्रि जागरण करते हुए अपनी साधना जारी रखी।
माता पार्वती की अटूट श्रद्धा, तपस्या और संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत श्रद्धा के साथ किया जाता है।
यह कथा नारी के संकल्प, धैर्य, तप और आत्मविश्वास का भी प्रतीक मानी जाती है। पर्व का मूल संदेश केवल मनोकामना पूर्ति नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और दृढ़ संकल्प के महत्व को समझना भी है।
हरतालिका तीज पर क्या करना माना जाता है शुभ?
हरतालिका तीज पर प्रचलित धार्मिक विधि के अनुसार प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। कई स्थानों पर बालू या मिट्टी से इनकी प्रतिमाएं बनाने की परंपरा भी है।
सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा में सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
इसके बाद शिव-पार्वती का पूजन, हरतालिका तीज की व्रत कथा का श्रवण तथा भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप किया जाता है। अनेक स्थानों पर महिलाएं रात्रि जागरण करते हुए भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं।
पर्वों का वास्तविक संदेश
ऋषि पंचमी हमें ऋषियों के ज्ञान और सदाचार का स्मरण कराती है। शनिवार की शनि उपासना कर्म और अनुशासन की भावना से जोड़ती है, जबकि हरतालिका तीज माता पार्वती की तपस्या, निष्ठा और संकल्प की कथा के माध्यम से श्रद्धा और धैर्य का संदेश देती है।
इन पर्वों की सार्थकता तभी है जब पूजा-पाठ के साथ हम अपने व्यवहार में भी सत्य, संयम, सेवा, करुणा और सदाचार को स्थान दें। धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंदों की सहायता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और परिवार एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी सनातन संस्कृति की मूल भावना का हिस्सा है।
लेखक: पंडित सुधीर तिवारी
धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों के अध्येता
डिस्क्लेमर: सरसों के तेल में चेहरा देखने, छाया दान करने अथवा शनि संबंधी अन्य उपायों का उल्लेख धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर किया गया है। इनके प्रभाव के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। किसी एक उपाय से कुंडली के सभी दोष समाप्त होने का दावा उचित नहीं है। प्रस्तुत धार्मिक सामग्री का उद्देश्य आस्था एवं परंपरा की जानकारी देना है। ‘राष्ट्र की परम्परा’ इसकी पुष्टि नहीं करता।

Editor CP pandey

Recent Posts

ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए KBBL अभियान का शुभारंभ

उद्यमी मेले में महिला उद्यमियों ने लगाए उत्पादों के स्टॉल, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की…

5 hours ago

यूपी में ECINET पोर्टल की सुरक्षा को लेकर बड़ा एक्शन!

सभी जिलों में कंप्यूटर सहायकों की लॉग-इन आईडी तत्काल बंद करने के निर्देश पीलीभीत प्रकरण…

6 hours ago

सरदार पटेल का जीवन राष्ट्रीय एकता, अखंडता और समर्पण की मिसाल : केशव प्रसाद मौर्य

जी.पी.ओ. पार्क में सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन, ‘पटेल…

6 hours ago

SIR पर सियासी संग्राम! खरगे ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला मोर्चा, पद से हटाने की मांग

मॉक संसद में खरगे का बड़ा हमला! CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, SIR…

6 hours ago

न्याय मांगने थाने पहुंची महिला के साथ दरिंदगी का आरोप! गम्हरिया में खाकी पर दाग, चार पुलिसकर्मी सस्पेंड

फोटो goo खाकी शर्मसार! जमशेदपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिस पुलिस थाने में पीड़ितों को…

7 hours ago