नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोकसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए सरकार से आग्रह किया कि वह होटल, रेस्तरां और ढाबों सहित विभिन्न भोजनालयों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों को विनियमित करने के लिए एक सुनियोजित और प्रभावी कानून बनाए। उन्होंने कहा कि देशभर में समोसे से लेकर थाली तक के दामों में भारी अंतर देखा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भ्रम और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है।
रवि किशन ने अपने वक्तव्य में कहा, “कोई समोसा कहीं 10 रुपये का मिलता है, तो कहीं 30 रुपये में वही समोसा बेचा जा रहा है। इसके आकार, स्वाद और गुणवत्ता में भी भारी अंतर है। ऐसा क्यों है? कोई एकरूपता नहीं है।” उन्होंने कहा कि ऐसे असमान मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी नीति या कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि आम जनता विशेषकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय लोगों को इस असमानता का खामियाजा भुगतना पड़ता है। “जब हम एक देश, एक टैक्स (GST) की बात करते हैं, तो फिर खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में भी एक समानता क्यों नहीं होनी चाहिए?” उन्होंने सवाल उठाया।
रवि किशन की यह मांग ऐसे समय आई है जब देशभर में खाद्य महंगाई और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दे ताकि इस विषय पर व्यापक अध्ययन कर आवश्यक कानून लाया जा सके।
प्रसंगवश, इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष और अन्य सांसदों ने भी रुचि दिखाई और इसे आम नागरिकों से जुड़ा एक व्यवहारिक विषय बताया।अब देखना होगा कि क्या सरकार इस दिशा में कोई पहल करती है और क्या देश में खाद्य पदार्थों की कीमतों को लेकर कोई मानकीकरण नीति बनती है।
फोटो सौजन्य से ANI
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