नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देशभर में हो रही लगातार भारी बारिश ने लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला है। एक ओर यह किसानों के लिए वरदान बनकर फसलों और जलस्तर को संजीवनी दे रही है, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बीमारियों का खतरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
मुंबई में हालात सबसे खराब मुंबई में पिछले दिनों हुई 500 मिमी से अधिक बारिश ने शहर को ठप कर दिया। गोरेगांव, लोखंडवाला, अंधेरी की वीरा देसाई रोड, मृणालताई गोरे फ्लाईओवर के नीचे के इलाके, माटुंगा, चेंबूर, खार, दादर पूर्व और कुर्ला समेत कई जगहों पर पानी भर गया। यातायात जाम से लोग घंटों परेशान रहे। लगातार बारिश से भूस्खलन की घटनाएँ हुईं और कई लोगों की मौतें भी दर्ज की गईं। सुरक्षा कारणों से स्कूल बंद रखने पड़े।
उत्तर भारत भी डूबा बारिश में
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और बिहार समेत कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।उत्तर प्रदेश: 36 जिलों में बाढ़ का असर है, करीब 6.5 लाख लोग प्रभावित हैं। इनमें से 65,437 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। राहत कार्यों में 2,610 नावें, 1,124 स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं। लोगों तक क्लोरीन टैबलेट और ORS का वितरण किया जा रहा है।
दिल्ली: लगातार बारिश और पहाड़ों से छोड़े गए पानी ने यमुना नदी को खतरे के निशान से ऊपर पहुँचा दिया है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर संभावित निकासी की तैयारी शुरू कर दी है।राजस्थान: असामान्य भारी बारिश ने कई जिलों में कहर ढाया है, अब तक 10 लोगों की मौतें दर्ज की गई हैं।बिहार: लगातार हो रही बारिश ने निचले इलाकों को डुबो दिया है। यहाँ भी जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में जलभराव से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के बाद लापरवाही बरतना लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह घर, छत, गमलों और टायरों में पानी जमा न होने दें।मच्छरदानी और रिपेलेंट का प्रयोग करें।बारिश के बाद गंदगी और खुले नालों से दूर रहें।बुखार, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बारिश जहाँ जीवन के लिए आवश्यक है और किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह लोगों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। पूरे देश में इस समय बरसात सामान्य से 30–58% अधिक दर्ज की गई है। ऐसे में ज़रूरी है कि लोग सावधानी बरतें और स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करें, ताकि यह प्राकृतिक वरदान अभिशाप में न बदल सके।
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