Friday, March 27, 2026
HomeUncategorizedकेएमसी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की हैवानियत! जूनियर छात्रों को बेरहमी से...

केएमसी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की हैवानियत! जूनियर छात्रों को बेरहमी से पीटा, जूता चटवा कर किया अपमान

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले के केएमसी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक घिनौना और अमानवीय चेहरा सामने आया है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के दो छात्रों के साथ सीनियर छात्रों ने न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उन्हें जबरन जूता चटवा कर मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया। इस शर्मनाक घटना से कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सात सीनियर छात्रों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त समाचार के अनुसार पीड़ित छात्र यशवर्धन सिंह निवासी—वाराणसी और देवांश सिंह निवासी—गाजीपुर के अनुसार, सोमवार शाम करीब पांच बजे एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के कुछ सीनियर छात्रों ने उन्हें कॉलेज परिसर में घेर लिया। आरोप है कि रैगिंग करने से इनकार करने पर आरोपी छात्रों ने लात-घूंसे, जूते, बेल्ट और लोहे की रॉड से दोनों की बर्बर पिटाई की। इस दौरान गाली-गलौज करते हुए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया और मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई।
शोर-शराबा सुनकर जब कॉलेज के गार्ड और शिक्षक मौके पर पहुंचे, तब कहीं जाकर मारपीट रुकी। पीड़ितों का आरोप है कि इससे पहले ही उन्हें जबरन जूता चटवा कर अपमानित किया जा चुका था। जाते-जाते आरोपी छात्रों ने जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे दोनों छात्र दहशत में आ गए।
घटना के बाद यूपी-112 पर सूचना दी गई। आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को छात्रों से मिलने से रोके रखा, जिससे मामले में देरी हुई। देर रात परिजनों के पहुंचने के बाद दोनों घायल छात्रों को सदर कोतवाली ले जाया गया, जहां उन्होंने लिखित तहरीर दी।
सदर कोतवाल निर्भय कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर स्वप्नील जायसवाल, समर प्रताप सिंह, उन्मेश, उत्कर्ष आनंद, अथर्व गर्ग, उत्कर्ष सिंह और पुल्कित के खिलाफ सामूहिक मारपीट, गंभीर चोट, अपमान, आपराधिक धमकी और रैगिंग से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। सवाल उठता है कि सख्त कानून और दिशा-निर्देशों के बावजूद ऐसी अमानवीय घटनाएं क्यों थम नहीं रही हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments