रेडियो आज भी समाज का सबसे विश्वसनीय और सशक्त माध्यम: मनीष त्रिपाठी


आपदा प्रबंधन, जन-जागरूकता और रोजगार के क्षेत्र में रेडियो की भूमिका पर विशेष व्याख्यान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता मनीष त्रिपाठी ने कहा कि रेडियो आज भी समाज का सबसे विश्वसनीय और सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन, संकट की घड़ी और दूरदराज़ क्षेत्रों में त्वरित सूचना पहुँचाने में रेडियो की भूमिका आज भी अतुलनीय है।

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दूरदर्शन केंद्र गोरखपुर के कार्यक्रम अधिशासी के रूप में कार्यरत मनीष त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए रेडियो के ऐतिहासिक विकास, तकनीकी संरचना और डिजिटल युग में उसकी निरंतर प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एफएम रेडियो, सामुदायिक रेडियो और ऑनलाइन रेडियो स्ट्रीमिंग ने रेडियो को नई ऊर्जा दी है, जिससे यह माध्यम आज भी जन-जन तक प्रभावी ढंग से पहुँच रहा है।

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उन्होंने रेडियो स्टेशन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए स्क्रिप्ट लेखन, वॉइस मॉड्यूलेशन, ऑडियो एडिटिंग, प्रसारण नियंत्रण कक्ष की तकनीकी व्यवस्था और कार्यक्रम निर्माण की पूरी प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया। साथ ही रेडियो के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार अवसरों की जानकारी देते हुए बताया कि आज वॉइस ओवर आर्टिस्ट, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, न्यूज़ रीडर और प्रोडक्शन असिस्टेंट जैसे प्रोफेशन में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएँ हैं।
मनीष त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि रेडियो पत्रकारिता में सफल होने के लिए भाषा की शुद्धता, स्पष्ट उच्चारण, विषय की गहरी समझ और निरंतर अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रेडियो न केवल सूचना का माध्यम है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और जागरूक बनाने का सशक्त मंच भी है।

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कार्यक्रम की शुरुआत पत्रकारिता पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. राजेश मल्ल के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आधुनिक सूचना तकनीक के विस्तार के बावजूद रेडियो की विश्वसनीयता और व्यापक पहुँच इसे अन्य माध्यमों से अलग और अधिक प्रभावशाली बनाती है।
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने रेडियो प्रसारण की व्यावहारिक चुनौतियों, कार्यक्रम चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण के अवसरों से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य वक्ता ने सभी प्रश्नों के विस्तार से उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

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इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. रजनीश चतुर्वेदी, डॉ. अन्वेषण सिंह, डॉ. नरगिस बानो और अभय शुक्ला की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। कुल मिलाकर यह व्याख्यान रेडियो पत्रकारिता में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और उपयोगी सिद्ध हुआ।

Editor CP pandey

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