बलिया में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, CHC खेजुरी में डॉक्टर न मिलने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने किया घायलों का प्राथमिक उपचार

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार को खेजुरी थाना क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खेजुरी में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया, जहां अस्पताल में डॉक्टर और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी नदारद मिले और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे इलाज की व्यवस्था चलती दिखाई दी।
जानकारी के अनुसार खेजुरी थाना क्षेत्र के अमरनाथ इंटर कॉलेज के सामने रविवार को एक ई-रिक्शा और बोलेरो पिकअप के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में ई-रिक्शा पर सवार तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बलिया में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, CHC खेजुरी में डॉक्टर न मिलने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने किया घायलों का प्राथमिक उपचार जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार को खेजुरी थाना क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खेजुरी में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया, जहां अस्पताल में डॉक्टर और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी नदारद मिले और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे इलाज की व्यवस्था चलती दिखाई दी।
जानकारी के अनुसार खेजुरी थाना क्षेत्र के अमरनाथ इंटर कॉलेज के सामने रविवार को एक ई-रिक्शा और बोलेरो पिकअप के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में ई-रिक्शा पर सवार तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेजुरी पहुंचाया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर वहां का नजारा देखकर लोग हैरान रह गए। उस समय अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी। अस्पताल में केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गुरुल मौजूद था। ऐसे में उसी कर्मचारी ने मानवता दिखाते हुए घायलों की प्राथमिक मरहम-पट्टी की और उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ई-रिक्शा अपनी सही दिशा में जा रहा था, तभी सामने से आ रहे बोलेरो पिकअप चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के चेतन किशोर निवासी सनी (25 वर्ष) पुत्र संजय राय, रोहित गोंड तथा सिवान कला निवासी मेराज गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के करीब आधे घंटे बाद एक युवक, जिसने फार्मासिस्ट की ट्रेनिंग ली हुई थी, अस्पताल पहुंचा और व्यवस्था संभालने का प्रयास किया। तब तक घायलों को जिला अस्पताल भेजने की तैयारी की जा चुकी थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी खेजुरी में रविवार के दिन अक्सर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पताल में केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर ही तैनात है तो वह ओपीडी और इमरजेंसी दोनों सेवाएं कैसे संभाल सकता है।
इस संबंध में मुख्य प्रभारी चिकित्सा अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधीक्षक रत्नेश कुमार से बात की है। उनके अनुसार डॉ. दिनेश की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था को उजागर करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर आम जनता को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिल ने मानवता दिखाते हुए घायलों की प्राथमिक मरहम-पट्टी की और उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ई-रिक्शा अपनी सही दिशा में जा रहा था, तभी सामने से आ रहे बोलेरो पिकअप चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के चेतन किशोर निवासी सनी (25 वर्ष) पुत्र संजय राय, रोहित गोंड तथा सिवान कला निवासी मेराज गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के करीब आधे घंटे बाद एक युवक, जिसने फार्मासिस्ट की ट्रेनिंग ली हुई थी, अस्पताल पहुंचा और व्यवस्था संभालने का प्रयास किया। तब तक घायलों को जिला अस्पताल भेजने की तैयारी की जा चुकी थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी खेजुरी में रविवार के दिन अक्सर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पताल में केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर ही तैनात है तो वह ओपीडी और इमरजेंसी दोनों सेवाएं कैसे संभाल सकता है।
इस संबंध में मुख्य प्रभारी चिकित्सा अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधीक्षक रत्नेश कुमार से बात की है। उनके अनुसार डॉ. दिनेश की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था को उजागर करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर आम जनता को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिलेगी ?

rkpnews@somnath

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