जेल की सुरक्षा पर सवाल, कैसे पहुंचा धमकी भरा पत्र बैरक तक

जेल में बंद पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत?


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जान से मारने की धमकी मिलने का गंभीर मामला सामने आया है। प्लाट आवंटन में धोखाधड़ी के आरोप में निरुद्ध अमिताभ ठाकुर की बैरक के सामने एक धमकी भरा पत्र मिलने के बाद जेल प्रशासन और परिजनों में हड़कंप मच गया है। यह पत्र कंप्यूटर से टाइप किया हुआ बताया जा रहा है, जिसे उनकी बैरक के सामने एक पत्थर के नीचे दबाकर रखा गया था। पत्र में न केवल जान से मारने की धमकी दी गई है, बल्कि आपत्तिजनक और अश्लील भाषा का भी प्रयोग किया गया है।

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अमिताभ ठाकुर ने इस घटना की जानकारी तुरंत अपने अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी और जेल अधीक्षक को दी। अधिवक्ता के अनुसार, धमकी मिलने के बाद अमिताभ ठाकुर अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। जेल के अंदर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद जेल प्रशासन ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू करने की बात कही है, हालांकि आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय देवरिया में पेशी प्रस्तावित है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को उनके अधिवक्ता उनसे मुलाकात के लिए जेल गए थे, जहां अमिताभ ठाकुर ने धमकी पत्र के बारे में पूरी जानकारी साझा की। अधिवक्ता ने बताया कि पत्र मिलने के बाद ठाकुर मानसिक रूप से असहज और भयभीत हैं।
गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर वर्ष 1999 में देवरिया जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उस दौरान देवरिया औद्योगिक स्टेट में उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम एक प्लाट का आवंटन हुआ था। आरोप है कि प्लाट आवंटन प्रक्रिया में नामों में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन के जरिए धोखाधड़ी की गई। इसी मामले में बीते सितंबर माह में लखनऊ के तालकटोरा थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 8 दिसंबर को दिल्ली जाते समय शाहजहांपुर के पास ट्रेन से उन्हें गिरफ्तार कर देवरिया लाया गया, जहां अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया।

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जेल में रहते हुए अमिताभ ठाकुर ने अपनी गिरफ्तारी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की मांग को लेकर आमरण अनशन भी किया था, जिसे बाद में न्यायालय के आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया। पेशी के दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कफ सिरप मामले से जुड़े बड़े खुलासों और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का दावा किया था। उनका आरोप रहा है कि सरकार नहीं चाहती कि वे इस मामले में आगे बढ़ें, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

Editor CP pandey

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