महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 4 नवंबर को जिला मुख्यालय पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में सैकड़ों जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। मंच से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इसे गरीब परिवारों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए योजना की सराहना की थी। लेकिन नौतनवां ब्लॉक क्षेत्र के 47 नवदंपतियों के लिए यह सौगात अब तक अधूरी साबित हो रही है। विवाह के तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें गृहस्थी का सामान नहीं मिल सका है।कार्यक्रम के दिन अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था का हवाला देते हुए प्रशासन ने घोषणा की थी कि सभी लाभार्थियों का सामान संबंधित ब्लॉक मुख्यालयों पर भेजकर वहां से वितरण कराया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक नौतनवां ब्लॉक का सामान कंटेनर के जरिए पहुंच भी चुका है। बताया जाता है कि गृहस्थी किट जिसमें दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं—ब्लॉक परिसर के एक कमरे में बंद कर रखी गई है। इसके बावजूद वितरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों का कहना है कि वे बार-बार ब्लाक मुख्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें जल्द वितरण होगा कह कर लौटा दिया जाता है। कुछ लाभार्थियों ने बताया कि नई गृहस्थी की शुरुआत में मिलने वाला यह सामान उनके लिए बेहद जरूरी है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण वे बाजार से सामान खरीदने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में योजना का लाभ समय पर न मिलना उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाह पंजीकरण के समय सभी लाभार्थियों के मोबाइल नंबर और पते विभागीय अभिलेखों में दर्ज किए गए थे। ऐसे में संबंधित अधिकारियों द्वारा फोन कर बुलाकर वितरण कराना कोई कठिन कार्य नहीं है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सामान ब्लॉक परिसर में मौजूद है तो वितरण में देरी क्यों हो रही है? क्या प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन है या जिम्मेदारों की उदासीनता इसका कारण है? लाभार्थियों के बीच अब नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। उनका कहना है कि यदि समय पर वितरण नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी वितरण प्रक्रिया को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाने की मांग की है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।
इस संबंध में एडीओ समाज कल्याण अधिकारी महेन्द्र प्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या नवदंपतियों को उनका अधिकार समय पर मिलेगा या योजना का लाभ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा—यह आने वाला समय तय करेगा।
