बनकटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव को लेकर जनता में आक्रोश, सांसद रमाशंकर विद्यार्थी कर रहे हैं लगातार मांग

(बृजेश मिश्र के कलम से )

बनकटा /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बनकटा रेलवे स्टेशन पर कोविड-19 महामारी के दौरान बंद हुए ट्रेनों के ठहराव को लेकर अब क्षेत्रीय जनता में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक ट्रेनों का ठहराव पुनः शुरू नहीं हो सका है, जिससे यात्रियों, खासकर छात्र-छात्राओं, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर सलेमपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर विद्यार्थी लगातार आवाज उठा रहे हैं। वे कई बार रेल मंत्रालय को पत्र लिख चुके हैं और संसद में भी यह मांग रख चुके हैं कि बनकटा स्टेशन पर पूर्व की भांति ट्रेनों का ठहराव पुनः शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि जनहित का सवाल है। लेकिन विपक्षी सांसद होने के कारण केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय इस गंभीर समस्या को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

छात्रों और ग्रामीणों की बड़ी समस्या

बनकटा रेलवे स्टेशन से कई गांवों के लोग सीधे जुड़े हैं। यहां से ट्रेनों के रुकने से छात्र-छात्राओं को अपने कॉलेज और विश्वविद्यालय जाने में सहूलियत मिलती थी। नौकरीपेशा लोग भी प्रतिदिन इसी स्टेशन से यात्रा करते थे। लेकिन अब इन्हें कई किलोमीटर दूर अन्य स्टेशनों पर जाना पड़ता है, जिससे समय, पैसा और श्रम – तीनों की बर्बादी हो रही है।

जनता में है भारी रोष

स्थानीय लोगों ने बताया कि कोविड का बहाना बनाकर ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया था, लेकिन अब जब देशभर में सभी सेवाएं सामान्य हो चुकी हैं, तो बनकटा जैसे छोटे लेकिन व्यस्त स्टेशन पर ट्रेनें क्यों नहीं रुक रहीं? ग्रामीणों का कहना है कि यह सरकार की उपेक्षा का उदाहरण है। यदि जल्द ही ठहराव बहाल नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने कहा –

“बनकटा स्टेशन का ठहराव बहाल कराना मेरी प्राथमिकता में है। मैंने संसद में मुद्दा उठाया है, रेल मंत्री को पत्र लिखा है। लेकिन दुख की बात है कि जनता की जरूरतों को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। यह एक प्रकार से लोकतंत्र का अपमान है।”

जन आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय सामाजिक संगठनों, छात्र संघों और व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि अगर एक महीने के अंदर ट्रेनों का ठहराव बहाल नहीं किया गया, तो वे रेलवे स्टेशन पर धरना, प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम उठाएंगे।

Editor CP pandey

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