राजनेता हमारे ही प्रतिमूर्ति होते हैं, जैसा समाज का चरित्र होता है वैसा ही चरित्र राजनीति का होता है: प्रो. रवि रमेशचंद्र शुक्ला जेएनयू

राजनीति के समक्ष संसाधनों के आवंटन की प्रक्रिया में लोगों की ज़रूरतें उनकी आकांक्षाएं पूरी करना बड़ी चुनौती: डॉ. शुक्ला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित वैल्यू एडेड कोर्स में शनिवार को मुख्य अतिथि तथा मुख्य वक्ता जेएनयू के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के डॉक्टर रवि रमेशचंद्र शुक्ला रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने की।
अपने उद्बोधन में डॉ. रवि रमेशचंद्र शुक्ला ने कहा कि भारत के राजनीतिक स्थिरता एक चुनौती है। राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक स्थिरता भी देश के विकास के लिए आवश्यक है। डॉ. रवि ने विकास के लिए नीतियों की निरंतरता के महत्व को रेखांकित किया।
जेएनयू के सेंटर फॉर कम्पेरेटिव पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल थ्योरी के अध्यक्ष डॉ. रवि ने कहा कि भारतीय राजनीति के समक्ष राष्ट्रीय अखंडता एक चुनौती है। राष्ट्रीय अखंडता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अखंडता और क्षेत्रीय आकांक्षाएं एक दूसरे की पूरक बनकर न की परस्पर विरोधी बनकर देश का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। राष्ट्रीय अखंडता कभी ना खत्म होने वाली प्रक्रिया है क्यूंकि नई पीढ़ी की नई आकांक्षाएं होती है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. रवि रामचंद्र शुक्ल ने
कहा कि भारत में राजनीति के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक विकास की है। नागरिक के निर्माण के विषय को नजअंदाज किया गया। मानव विकास पर तथा नैतिक समाज के निर्माण को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया। राजनीतिज्ञ हमारे ही प्रतिमूर्ति होते हैं जैसा समाज का चरित्र होता है वैसा ही चरित्र राजनीति का होता है भारत की राजनीति को आवश्यकता है कि वह चुनावी राजनीति से आगे बढ़े राजनीतिक विकास राजनीतिक भागीदारी जो काफी कम है उसे उसे आगे बढ़ना होगा।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि भ्रष्टाचार खासकर जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती है। भारत के राजनीति के समक्ष संसाधनों के आवंटन की प्रक्रिया में हमें देश के लोगों की ज़रूरतें उनकी आकांक्षाएं पूरी करनी होगी यह भारत के राजनीति की के समक्ष बड़ी चुनौती है।
डॉ. रवि ने साम्प्रदायिकता तथा धर्म के बीच अलगाव को रेखांकित किया तथा इस सोच को पैदा करने के लिए यूरोपीय मानसिकता से ग्रसित बौद्धिक वर्ग को जिम्मेदार बताया। भारत में धर्म की अवधारणा को यूरोप के रिलिजन से अलग बताते हुए डॉ. रवि ने भारत को एक भू सांस्कृतिक इकाई बताया जिसका निर्माण सतत रूप से होता आया है न कि किसी एक खास तिथि या घटना पर हुआ है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने किया तथा कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग के शिक्षक गण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

rkpnews@desk

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