CHC हॉस्पिटल की NOC रद्द होने पर सियासी घमासान, बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का बड़ा आरोप – “विकास रोकना ही इनका एजेंडा”

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हॉस्पिटल का निर्माण शुरू होने से पहले ही अटक गया है। अस्पताल के लिए जारी की गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को निरस्त किए जाने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने इसे खुली राजनीतिक साज़िश बताते हुए कुछ “माननीय नेताओं” पर विकास विरोधी मानसिकता का गंभीर आरोप लगाया है।

विधायक उमाशंकर सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि बलिया में कुछ ऐसे नेता हैं, जो खुद विकास का कोई काम नहीं करते, बल्कि जो विकास करना चाहता है, उसका रास्ता रोकने में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि “रसड़ा की जनता के साथ यह सरासर अन्याय है। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा को राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया है।”

राजनीतिक दबाव में रोकी गई स्वास्थ्य परियोजना

विधायक का आरोप है कि CHC हॉस्पिटल के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं। जमीन, नक्शा और अन्य औपचारिकताएं तय मानकों के अनुरूप थीं, इसके बावजूद राजनीतिक दबाव बनाकर NOC रद्द कराई गई। इससे हजारों लोगों को मिलने वाली सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं पर रोक लग गई है। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि रसड़ा की जनता के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

पहले से ही बदहाल है स्वास्थ्य व्यवस्था

रसड़ा क्षेत्र पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बलिया या वाराणसी तक जाना पड़ता है। ऐसे में CHC हॉस्पिटल खुलने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन योजना रुकने से आम जनता में गहरा आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।

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जनता की सेहत या राजनीतिक द्वेष?

CHC हॉस्पिटल की NOC रद्द होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जनता की सेहत से ज्यादा अहम राजनीतिक द्वेष है? क्या विकास योजनाएं अब राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ती रहेंगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं भी राजनीति की शिकार होंगी, तो आम आदमी का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा।

जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह कौन सा “माननीय” है, जिसके हस्तक्षेप से रसड़ा की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित किया गया। विधायक उमाशंकर सिंह के बयान के बाद यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।

उबाल पर रसड़ा

विधायक के आरोपों के बाद रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग खुलकर सवाल पूछ रहे हैं कि यदि अस्पताल जैसी जनहित की योजनाएं भी राजनीति की भेंट चढ़ती रहीं, तो विकास का सपना कैसे साकार होगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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Karan Pandey

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