Sunday, January 25, 2026
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पश्चिम बंगाल में वोटर सत्यापन को लेकर बढ़ा राजनीतिक ताप

संदिग्ध वोटरों की लिस्ट लीक पर बवाल, चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट, रविवार से शुरू होगी छंटनी प्रक्रिया

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान वोटरों की पहचान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शनिवार रात दिल्ली से संदिग्ध वोटरों की लिस्ट राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय पहुंची, लेकिन उससे पहले ही यह सूची सार्वजनिक होकर लीक हो गई। इसके साथ ही नो-मैपिंग मतदाता सूची भी कोलकाता भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
शनिवार को दिनभर राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध वोटरों की लिस्ट प्रकाशित होने की खबरें सामने आईं। सवाल उठ रहा है कि जब सूची आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुई थी, तो यह किन माध्यमों से बाहर आई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और पूछा है कि सूची का प्रकाशन किसके आदेश पर और कैसे हुआ।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार छंटनी की प्रक्रिया रविवार से शुरू होगी। कोर्ट के आदेश के तहत ही संदिग्ध वोटरों की लिस्ट प्रकाशित की जानी थी। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने पिछले बुधवार को घोषणा की थी कि शनिवार को दोनों सूचियां—संदिग्ध वोटरों की लिस्ट और नो-मैपिंग मतदाता सूची—एक साथ जारी की जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 20 लाख नागरिकों से जुड़ी यह सूची शनिवार रात दिल्ली से सीईओ कार्यालय पहुंची और फिर ईआरओ को भेज दी गई। हालांकि, इसे तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया। अब यह सूची रविवार सुबह से विशिष्ट स्थानों पर प्रदर्शित की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह सूची पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका और वार्ड कार्यालयों में चस्पा की जाएगी, ताकि मतदाता अपनी स्थिति की जांच कर सकें।
चुनाव आयोग ने सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और जिला मजिस्ट्रेटों से रिपोर्ट मांगी है, जहां-जहां सूची पहले प्रकाशित होने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ गया है।

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