मेरी रचना, मेरी कविता
——X——
कवि हृदय व्यथित हो जाता है,
सामाजिक झँझावातों से,
कल्पना लोक, संभ्रमित करे,
रचना रूपी ख़्यालातों से ।
सरगम के सप्त स्वरों का लय,
शुभ इंद्र धनुष के सात रंग,
सप्त ऋषि बन कर बिचरें,
कवि मन का होता ध्यान भंग।
सात समुंदर के पार तलक,
कल्पना लोक का विचरण हो,
सात महाद्वीपों की महिमा,
कवि की रचना की शरण में हो।
सात दिनो की गाथा गाये,
सात अजूबे दुनिया के,
जैसे आकर्षण बन जायें,
सप्तसरोवर सप्तऋषि के।
द्युत क्रीड़ा,मांसाहारी,मद्दपान,
शिकारवृत्ति, वेश्या गमनम,
चौर्यकरण, पर-दारा रमणम,
सप्त व्यसन कविता रचनम।
आयु, प्राण, प्रतिष्ठा, प्रज्ञा, सातों
प्रतिफल हैं कवि की रचना में,
द्रव्य, जीव व ब्रह्मचर्य वृत, कवि
गाता है गायत्री की महिमा में।
कल्पना लोक का विचरण कर,
कविता का लेखन सरपट दौड़े,
तब भाव, कुभाव ग्रसित हो कर,
उद्वेलित मन कवि का भी डोले।
शीर्षक कविता का मिल जाये,
रचना धर्मिता खिल खिल जाये,
‘आदित्य’ कहें संयोग सुलभ,
जब गीत विरह से बन जाये ।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य‘
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में बच्चों को खतरनाक संक्रामक बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से…
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। विश्वविद्यालय में अनुसंधान को नई दिशा और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से…
भक्ति के रंग में रंगा बनकटाशिव, वेद मंत्रों और भजनों की गूँज से मंत्रमुग्ध हुए…
शाहजहाँपुर (राष्ट्र की परम्परा)। थाना गढ़िया रंगीन पुलिस ने हत्या के एक मामले में वांछित…
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान में “सतत…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट…