खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान: 27 फरवरी तक चलेगा टीकाकरण

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में बच्चों को खतरनाक संक्रामक बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी गई है। सोमवार को नगर क्षेत्र स्थित गुरु गोविन्द सिंह प्राथमिक विद्यालय से इस विशेष अभियान का विधिवत शुभारम्भ किया गया। इस अभियान का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव ने फीता काटकर किया। अभियान के पहले दिन विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों का टीकाकरण कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान 27 फरवरी 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान जिले के कुल 3039 विद्यालयों और मदरसों में अध्ययनरत 5 से 10 वर्ष आयुवर्ग के लगभग 2.29 लाख बच्चों को एमआर वैक्सीन दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को जनपद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है और इसके सफल संचालन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारी
सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि खसरा और रूबेला दोनों ही गंभीर संक्रामक रोग हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण कर बच्चों को इन रोगों से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसी भी बच्चे को टीकाकरण से वंचित न रहना पड़े।
उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) को प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें विद्यालय प्रबंधन के सहयोग से नियमित रूप से कार्य करेंगी।
सीएमओ ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से एमआर टीका लगवाएं और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने बताया कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।
स्कूलों में पहले से दी जाएगी सूचना
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिन्हा ने बताया कि टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें विद्यालयों में टीकाकरण से एक दिन पहले सूचना देंगी, जिससे विद्यालय प्रशासन और अभिभावक पहले से तैयार रह सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों को खाली पेट टीका नहीं लगाया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी बच्चों को मिड-डे मील अथवा लंच के बाद ही वैक्सीन दी जाएगी, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने बताया कि एमआर टीकाकरण अभियान केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य समाज को भी खसरा और रूबेला जैसी बीमारियों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकतम बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा तो इन बीमारियों के प्रसार को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
खसरा और रूबेला के लक्षण और खतरे
विशेषज्ञों के अनुसार खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो बच्चों में तेजी से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, आंखों का लाल होना तथा चेहरे और शरीर पर लाल चकत्ते उभरना शामिल है। वहीं रूबेला गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इससे नवजात शिशुओं में जन्मजात विकृतियां होने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर टीकाकरण ही इन दोनों बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इसी उद्देश्य से सरकार लगातार टीकाकरण अभियान चला रही है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था भी लागू की है। टीकाकरण अभियान की दैनिक रिपोर्टिंग डिजिटल पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक विद्यालय और प्रत्येक बच्चे तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचे तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही की तुरंत पहचान हो सके।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग का संयुक्त प्रयास
यह अभियान स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त समन्वय से संचालित किया जा रहा है। विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति, टीकाकरण की व्यवस्था तथा अभिभावकों को जागरूक करने के लिए दोनों विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को सफल बनाने में काफी सहायता मिलेगी।
सामाजिक संस्थाओं का भी मिल रहा सहयोग
अभियान के सफल संचालन में कई सहयोगी संस्थाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ तथा जेएसआई सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे और उन्होंने जनजागरूकता एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया। इन संस्थाओं द्वारा समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
जनसहभागिता से बनेगा अभियान सफल
अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान की सफलता जनसहभागिता पर निर्भर करती है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समिति, शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का टीकाकरण सुनिश्चित कर ही खसरा-रूबेला मुक्त समाज का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
जिले को रोगमुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
देवरिया जिले में चलाया जा रहा यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभियान निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सफल रहा तो जिले में खसरा और रूबेला जैसी बीमारियों के मामलों में भारी कमी आएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण पूरी तरह निःशुल्क है और इसे सरकारी विद्यालयों, मदरसों तथा चयनित केंद्रों पर लगाया जाएगा। विभाग ने यह भी बताया कि किसी भी बच्चे के छूट जाने पर उसे बाद में भी टीकाकरण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

rkpNavneet Mishra

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