एक अच्छे साहित्यकार भी थे पंडित अलगू राय शास्त्री
मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के अग्रिम क़तार के नेता पंडित अलगू राय शास्त्री जी का जन्म 29 जनवरी 1900 ईस्वी में अमिला के कोट मुहल्ले तत्कालीन आजमगढ़ जनपद ( वर्तमान में मऊ जनपद में ) उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता द्वारिका राय एक साधारण किसान एवं माता श्रीमती कमला देवी विदुषी एवं धार्मिक महिला थीं। पंडित अलगू राय शास्त्री जी के नामकरण के बारे में बहुचर्चित किवदंती है कि जिस दिन इनका जन्म हुआ उसी दिन इनके घर- द्वार,खेत- खलिहान, धन- संपत्ति का बंटवारा (अलगाव )हुआ, इसी कारण इनके माता-पिता ने इनका नाम अलगू’रखा।
उनकी आरम्भिक शिक्षा…..
प्राथमिक शिक्षा – प्राथमिक पाठशाला अमिला एवं जूनियर हाईस्कूल घोसी में हूई । हाईस्कूल एवं इंटर -हरिश्चंद्र कॉलेज वाराणसी।( गुरु कामेश्वर मिश्र के संरक्षण में ) । उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे वाराणसी गये ।
स्नातक तक की शिक्षा काशी विद्यापीठ वाराणसी से प्राप्त की। जब वह स्नातक शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उस समय महात्मा गांधी का भारत में आगमन हो गया था और महात्मा गांधी एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे थे ।
असहयोग आंदोलन में अलगू जी की भूमिका….
स्नातक में अध्ययन के दौरान 1920 ईस्वी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का असहयोग आंदोलन आरंभ हो चुका था अलगू जी एक सच्चे सत्याग्रही की तरह पूरी निष्ठा एवं समर्पण की भावना से इस आंदोलन में कूद पड़े ,जिसके कारण ब्रिटिश शासन ने इन्हें जेल भेज कर बहुत प्रताड़ित किया इस जेल यात्रा से अलगू जी के हृदय में पल रहे देशप्रेम और समाजसेवा के भाव और प्रबल, प्रगाढ़ और मजबूत हो गये। जेल से छूटने के उपरांत 1923 ईस्वी में इन्होंने काशी विद्यापीठ – वाराणसी से शास्त्री की उपाधि हासिल की। 1924 ईस्वी में लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित लोक सेवक मंडल ( सर्वेंट आफ पीपुल्स सोसाइटी ,स्थापना- 1921 ईस्वी ) के सक्रिय सदस्य बनें। मां भारती के प्रति सेवाभाव एवं इनकी नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर इन्हें कार्य क्षेत्र के रूप में मेरठ भेज दिया गया इसी दौरान मेरठ में कुमार आश्रम और गुरुकुल डाबली की स्थापना की गई जहां दलित बच्चों को निःशुल्क एवं बिना भेदभाव के शिक्षा दी जाती थी इसमें अलगू जी ने अध्यापन का कार्य कर अपनी सेवाएं दीं।
1928 ईस्वी में गो बैक साइमन कमीशन,1930 ईस्वी में नमक सत्याग्रह में भी सक्रिय आंदोलनकारी रहे इस दौरान ये कई बार जेल भी गए। 1933 ईस्वी में ऐसा भी समय आया जब अलगू जी के साथ-साथ इनके पूरे परिवार में रामलच्छन राय (भाई),परमेश्वरी देवी (पत्नी), विद्या (बेटी), अरविंद (बेटा) को ब्रिटिश शासन ने जेल भेज कर कठोर यातनाएं दीं।
भारत शासन अधिनियम…
1935 लागू होने के उपरांत 1937 ईस्वी में जब विधानसभाओं के गठन हेतु निर्वाचन की घोषणा हुई तो इनके राजनीतिक सलाहकार रघुवीर सिंह एवं अन्य वरिष्ठ साथियों ने इन्हें मेरठ से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया, क्योंकि मेरठ अब इनकी कर्मभूमि बन चुकी थी और यहां वे काफी लोकप्रिय हो चुके थें जबकि इनकी जन्मभूमि (अमिला- आजमगढ़) के लोग भी अपने यहां से चुनाव लड़ने की जिद करने लगे। अलगू जी असमंजस में पड़ गए,काफी राय- मशविरा के बाद अपनी जन्मभूमि वाले निर्वाचन क्षेत्र – सगड़ी- नत्थूपुर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ने का फैसला किया। विरोधियों ने आरोप लगाया कि अलगू तो मेरठ में रहते हैं वह बाहरी हैं और नारा भी गढ़ दिया
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“अलगू अलग विलग हो जईहें, जईहें मेरठ सहरिया ना”।
लेकिन अलगू जी बड़े ही सादगी के साथ गांधी जी और नेहरू जी के विचारों को लेकर जनता के बीच में गए और तमाम आरोपों- प्रत्यारोपों के बावजूद अपने प्रतिद्वंद्वी सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रामनयन शर्मा को 23000 (तेईस हजार)के बड़े अंतर से हराया।
संविधान सभा के सदस्य के रूप में……
संविधान सभा के सदस्य के रूप में अलगू जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि जब संविधान सभा में भारत की राजभाषा क्या हो ? इस विषय पर चर्चा हो रही थी तो इन्होंने हिंदी भाषा का समर्थन किया। संविधान सभा में हिंदी राजभाषा के लिए अलगू जी द्वारा दिया गया हिंदी में यह ऐतिहासिक भाषण आज भी संविधान सभा के रिकॉर्ड में संरक्षित है। स्वाधीनता उपरांत एक शानदार , ईमानदार, समाज सेवा की उत्कट भावना , विकास की सोच के साथ संवेदनशील जनप्रतिनिधि के रूप में अलगू राय शास्त्री जी ने शानदार भूमिका निभाई ।
स्वतंत्र भारत के प्रथम आमचुनाव……
1952 ईस्वी में अलगू जी अपने गृह क्षेत्र के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ पूर्व से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए। किसानों की समस्याओं से संसद को ध्यान आकृष्ट करने के लिए अलगू जी संसद में गोंठा की भेली, गुड़ और गोबरैला अनाज लेकर व्याख्या करते हुए कहते हैं कि “भारत कृषि प्रधान देश है,अब स्वतंत्र भी हो चुका है लेकिन आज भी मेरे गृहक्षेत्र के किसानों की हालत बदतर है,सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है,सिंचाई के संसाधनों के अभाव में भी वे खून पसीना एक कर खेती कर रहे हैं इसका समाधान करें मान्यवर।
अलगू जी के इसी शानदार भाषण और बेहतर संवाद शैली से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी ने ‘ पटेल आयोग’ का गठन किया। पटेल आयोग के निरीक्षण के उपरांत क्षेत्र के दोहरीघाट में एशिया की पहली पंप कैनाल स्थापित हुई जो इनके कर्मठ एवं संवेदनशील नेतृत्व की आज भी पहचान है। अलगू जी जीवनपर्यंत सामाजिक, राजनीतिक भागीदारी एवं देशसेवा में समर्पित रहे। 12 फरवरी 1967ईस्वी को अलगू जी का निधन हो गया।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य, शिक्षाविद् , कानूनविद् ,एवं क्षेत्र से प्रथम लोकसभा का सांसद होने के बावजूद पंडित अलगू राय शास्त्री जी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं।
बस स्टेशन….
बस स्टेशन मऊ के परिसर में अलगू जी की एक छोटी सी प्रतिमा है। आज वह भी उपेक्षा का शिकार है जनपद मऊ में उनके नाम से ना कोई पार्क है, ना कोई संग्रहालय है,ना कोई कॉलेज है,ना कोई पुस्तकालय है, ना कोई सड़क है जो शासन और प्रशासन की उदासीनता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। स्वामी सहजानंद सरस्वती और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से सीधा संवाद करने वाले अलगू राय शास्त्री के नाम कोई न कोई प्रतिष्ठान स्थापित किया जाना चाहिए ।
