राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर का आयोजन

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)संत बिनोवा पी o जीo कॉलेज, देवरिया, में राष्ट्रीय सेवा योजना का सप्त दिवसीय विशेष शिविर के दूसरे दिन मां सरस्वती की वंदना, लक्ष्य गीत और झंडा गीत के साथ इस सत्र का शुभारंभ हुआ। सत्र के दूसरे अंक में स्वयंसेवकों ने विद्यालय की स्वच्छता अभियान के अंतर्गत साफ सफाई किया। लोगों ने स्वच्छता अभियान में रुचि दिखाई और स्वच्छता के मायने सीखा। आज की बौद्धिक सत्र में मुख्य अतिथि संत बिनोवा महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ वीरेंद्र मणि त्रिपाठी थे। उन्होंने कहां की राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक ही समाज में वैज्ञानिक समाज का निर्माण कर सकते हैं। एक ऐसा समाज जिसमें भेदभाव ना हो पूर्वाग्रह ना हो, सभी एक लोकतांत्रिक वातावरण में अपने अपने जीवन के विकास की प्रत्येक संभावनाओं को ढूंढ सकते हों।समाज में हो रहे सांप्रदायिक दंगे का कारण आर्थिक पिछड़ापन, बेरोजगारी, गरीबी, उत्कट महत्वाकांक्षा आदि है। विभिन्न धर्मों के कट्टरपंथी अपने धर्मों के मतावलंबियों की संख्या को बढ़ाने के लिए धन का लालच अथवा डर दिखाकर के गरीब व्यक्ति का मानसिक शोधन करते हैं और उन्हें धार्मिक कट्टरता के कार्यों जैसे आतंकवाद सांप्रदायिक दंगे , और सामाजिक वैमनस्यता कराते हैं तथा कट्टरपंथी शक्ति के रूप में उनका इस्तेमाल करते हैं भोले _भाले लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं। राजनीतिक सत्ता हासिल करना इन कट्टरपंथी ताकतों का अपना मूल उद्देश्य ही होता है।डॉ वीरेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों मे धार्मिक सहिष्णुता होना चाहिए।
डॉ वीरेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि जीवन में स्वयंसेवकों को धैर्य रखना चाहिए जिससे उनके जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त हो। अपने कार्य के प्रति ईमानदार रहे। आचरण में सुधार करें ।आचरण ही व्यक्ति कोआगे बढ़ाता है।
कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर चंद्रेश बारी में समाज में हो रहे घरेलू हिंसा और संपोषणीय विकास पर अपना विस्तृत व्याख्यान दिय डा चंद्रेश बारी ने कहा की समाज में जब तक परिवार अपने सदस्यों को समाजीकरण और नैतिकता ईमानदारी जैसे मूल मानवीय आदर्शों की शिक्षा नहीं देता है तब तक इस समाज में घरेलू हिंसा महिलाओं पर हिंसा और महिला सुरक्षा जैसी घटना घटती रहेंगी।
डॉक्टर चंद्रेश बारी ने कहा भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में ही पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो चुके हैं। मालदीव जैसे छोटे-छोटे दीप जो समुद्र के निचले स्तर पर है ग्लेशियर के पिघलने से और ग्लोबल वार्मिंग के आने से समुद्र में ही डूब जाएंगे। अम्लीय वर्षा ओजोन परत का क्षरण विभिन्न प्रकार की बीमारियां पर्यावरण अब अवमूल्यन का संकेत है। हम जब तक पर्यावरण के प्रति सचेत नहीं रहेंगे तब तक मानव और प्रकृति का संतुलन नहीं रहेगा और सृष्टि काअस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ कृष्ण मुरारी गुप्ता ने कहा कि स्वयंसेवकों को किसी भी कार्य को ऊंचा या नीचा नहीं समझना चाहिए समाज में सभी कार्य समान है, व्यक्ति को अपने जीवन में पूर्ण उत्साह के साथ आगे बढ़ना चाहिए ।उन्होंने स्वयंसेवकों को सलाह दिया कि वह विभिन्न अपराधों और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहें।इस कार्यक्रम में अंबुज यादव तेज प्रताप आदि मौजूद रहे।

rkpnews@somnath

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