श्रीअन्न से पोषण और समृद्धि की ओर बढ़ता मऊ, मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 को मिल रहा जनसमर्थन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल के तहत श्रीअन्न—जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो और सावा—को सुपर फूड के रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विशेष रूप से तैयार एलईडी वैन के माध्यम से शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को श्रीअन्न के पोषण, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य किसानों और आमजन को श्रीअन्न की खेती एवं उपभोग के लिए प्रेरित करना है, ताकि यह अनाज एक बार फिर दैनिक आहार का हिस्सा बन सके।

विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मिलेट्स कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये अनाज मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव में सहायक माने जाते हैं। उच्च फाइबर रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जबकि आयरन और कैल्शियम शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। बदलती जीवनशैली और बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों के बीच श्रीअन्न का नियमित सेवन स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना भी है। श्रीअन्न की फसलें कम पानी में आसानी से उगाई जा सकती हैं और विपरीत जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देती हैं। इनकी खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में ये फसलें किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन रही हैं।

मऊ जनपद में तीन प्रमुख स्थानों पर एलईडी वाहन के माध्यम से लघु फिल्में, लोकगीत, विज्ञापन और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गईं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों ने मिलेट्स से जुड़े संदेशों को रुचिपूर्वक देखा और समझा। इस आधुनिक प्रचार पद्धति से युवाओं और महिलाओं में विशेष जागरूकता देखने को मिली है।

कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मिलेट्स बीज मिनीकिट का निःशुल्क वितरण, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर अनुदान, मोबाइल आउटलेट के लिए वित्तीय सहायता, मिलेट्स स्टोर स्थापना पर अनुदान, प्रेरणा कैंटीन के लिए सहायता तथा प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को श्रीअन्न की खेती से अधिक आय अर्जित करने के लिए सक्षम बनाना है।

विश्व स्तर पर मिलेट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और जैविक खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता ने श्रीअन्न को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के किसान इस बढ़ती मांग का लाभ उठाएं और निर्यात के अवसरों का भी उपयोग करें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भोजन कार्यक्रमों में श्रीअन्न को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों और महिलाओं को संतुलित आहार मिल सके।

उप कृषि निदेशक ने अपील की है कि किसान और आमजन श्रीअन्न को अपने दैनिक आहार में शामिल करें तथा इसकी खेती को बढ़ावा दें। जनभागीदारी से ही यह अभियान सफल होगा और प्रदेश को पोषण, पर्यावरण तथा आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने का लक्ष्य साकार हो सकेगा।

rkpNavneet Mishra

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