Wednesday, February 25, 2026
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चंद्रशेखर उद्यान में एक दिवसीय माटीकला जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


बलिया(राष्ट्र कि परम्परा)

उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा आयोजित एक दिवसीय माटीकला जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार को चंद्रशेखर उद्यान में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कुम्हार समुदाय के लोग, जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से निर्मित वस्तुएं भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान हैं। इन्हें आधुनिक बाजार से जोड़कर कुम्हार समुदाय की आय में वृद्धि की जा सकती है। इसी उद्देश्य से नि:शुल्क विद्युत चालित चाक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
मंत्री ने बताया कि जिले के 17 विकास खंडों के ग्राम प्रधानों के सहयोग से अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत माटीकला टूल किट (विद्युत चालित चाक) 28 लाभार्थियों को वितरित की गई। इसके अतिरिक्त माटीकला टूल किट के तहत पागमील मशीन 5 लाभार्थियों को प्रदान की गई, जिससे मिट्टी को बेहतर ढंग से तैयार कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाभार्थियों को 10 हजार रुपये तक का मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि कारीगर अपने कार्य को और सुदृढ़ कर सकें। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कुम्हार समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके पारंपरिक व्यवसाय को नई दिशा देना है।कार्यक्रम के दौरान जिले के 17 ब्लाकों के ग्राम प्रधानों को अंगवस्त्र और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंत्री ने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों को इस योजना से जोड़ें, ताकि उन्हें आधुनिक संसाधनों का लाभ मिल सके।जिला ग्रामोद्योग अधिकारी संस्कृति गुप्ता ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि माटीकला बोर्ड द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। इससे कारीगरों को आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में सहायता मिलेगी।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सरकार की इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे जिले में माटीकला को नई रफ्तार मिलेगी तथा कुम्हार समुदाय आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम

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