गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश एवं दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के ललित कला एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 13 दिवसीय कार्यशाला के छठवें दिन, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों ने पारंपरिक बिदेशिया की बारीकियों को समझते हुए बहुत ही मनोयोग से अभ्यास किया।लोकगीत की पारंपरिक विधा को विस्तार देते हुए कार्यशाला के प्रशिक्षक एवं पूर्वांचल के लोकप्रिय लोकगायक राकेश उपाध्याय ने रविवार को एक लोकभजन लिखवाया और सिखाया वही बच्चों ने उसी भाव में अभ्यास किया,जिसके बोल थे-कान्हा बिना सुन लागे जमुना किनरवा हे ऊधौ बाबा ना लागे मोर मनवाँ।आज कार्यशाला में गोरखपुरिया भोजपुरिया परिवार के सदस्य नरेन्द्र मिश्र एवं विकास श्रीवास्तव पधारे,उन्होंने अपनीं ओर से भी बच्चों को स्वल्पाहार देकर मुह मीठा कराया एवं सभी प्रकार के लोकगीतों को सुना।मुख्य प्रशिक्षक राकेश उपाध्याय के साथ सहयोग में गोपाल पांडेय एवं सूरज कुमार रहे।
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