कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। यदि भारत की राजनीति को गहराई से समझना हो, तो उत्तर प्रदेश को पढ़ना अनिवार्य है। यह प्रदेश केवल भौगोलिक दृष्टि से ही देश का सबसे बड़ा राज्य नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना, प्रयोगों और संघर्षों की सबसे बड़ी प्रयोगशाला भी है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था तक, उत्तर प्रदेश ने राजनीति को दिशा दी है, नेतृत्व गढ़ा है और सत्ता की धुरी को लगातार प्रभावित किया है। इसी कारण इसे भारतीय राजनीति का विश्वविद्यालय कहा जाता है।
प्रधानमंत्री देने वाला सबसे बड़ा प्रदेश
उत्तर प्रदेश ने देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री दिए हैं— पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वी.पी. सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी। यह महज संयोग नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक परिपक्वता और निर्णायक जनमत का प्रमाण है।
यहां का जनादेश केवल सरकारें नहीं बनाता, बल्कि विचारधाराओं को वैधता और नेताओं को राष्ट्रीय पहचान देता है।
आंदोलन, विचारधाराएं और सामाजिक न्याय
किसान आंदोलन, समाजवादी चिंतन, दलित राजनीति और सामाजिक न्याय—इन सभी धाराओं का प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्पष्ट दिखाई देता है।
डॉ. राममनोहर लोहिया की समाजवादी सोच, कांशीराम और मायावती के नेतृत्व में दलित राजनीति का उभार और किसानों के आंदोलनों ने देशव्यापी राजनीति को दिशा दी। यहां सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, बल्कि सत्ता-साझेदारी का व्यावहारिक मॉडल बना।
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जाति, वर्ग और क्षेत्र: जटिल लेकिन निर्णायक
उत्तर प्रदेश की राजनीति की जटिलता ही उसकी पहचान है। जाति, वर्ग, क्षेत्र और धर्म—इन चारों का संतुलन साधना यहां सफल राजनीति की कसौटी है।
पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और बुंदेलखंड—हर क्षेत्र की अपनी राजनीतिक भाषा और अपेक्षाएं हैं। जो दल या नेता इस विविधता को समझ लेता है, वही सत्ता के शिखर तक पहुंचता है।
चुनाव: उत्सव भी, परीक्षा भी
उत्तर प्रदेश में चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव और परीक्षा दोनों होते हैं। बूथ स्तर की रणनीति, गठबंधन की गणित और जनभावनाओं की नब्ज—यहीं से राष्ट्रीय राजनीति के सूत्र निकलते हैं।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों ने साबित कर दिया कि दिल्ली की सत्ता की चाबी लखनऊ की गलियों से होकर गुजरती है।
बदलती राजनीति, नया पाठ्यक्रम
आज विकास, कानून-व्यवस्था, रोजगार और पहचान की राजनीति साथ-साथ चल रही है। डिजिटल राजनीति, सोशल मीडिया और युवा मतदाता की बढ़ती भूमिका इस बात का संकेत है कि राजनीति का यह विश्वविद्यालय समय के साथ अपने पाठ्यक्रम को अपडेट कर रहा है।
उत्तर प्रदेश को केवल एक राज्य मानना उसकी ऐतिहासिक और राजनीतिक भूमिका को कम आंकना होगा। यह प्रदेश नेताओं की नर्सरी, आंदोलनों की प्रयोगशाला और सत्ता की पाठशाला है।
जो उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझ गया, उसने भारत की राजनीति की डिग्री हासिल कर ली।
इसीलिए— उत्तर प्रदेश केवल एक प्रदेश नहीं, भारतीय राजनीति का विश्वविद्यालय है।
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