बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
भारत मे ऐसे कई प्रदेश है जहाँ कुछ जातियों के लोग घूमन्तु जिंदगी जीने पर मजबूर है, आज यहाँ तो कल कही और। पेट के लिए दूर प्रदेशो मे अपना डेरा डाल कर रोजी रोटी के जुगाड़ मे लगे रहते है।
कोई खिलौना बेच कर, तो कोई ठंडे वस्त्र को पीठ पर लादकर घूम घूम कर बेचते है और अपना और अपने परिवार का पेट पालते।
आज कल बरहज नगर के मुख्य मार्ग से सटे लोहे के औजार बनाते इन्हे देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश के सागर जिले से कई झुण्ड मे आए इन घूमन्तु लोगो को उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदो मे लोहे का औजार बनाते देखा जा रहा है। पूछने पर पत्ता चला कि ए लोग सड़क के किनारे अपना डेरा डाल कर रहते है और अपना रोजगार करते है। बरहज मे इस कड़ाके कि ठंड मे ये लोग बरहज देवरिया मार्ग के किनारे टेंट डालकर लोहे का औजार बनाने का काम कर रहे है। इन लोगो का एक से दो माह तक ही किसी जिले मे ठिकाना होता।
लोगो का कहना है कि ज़ब तक धंधा चलता है तबतक हम लोग उस स्थान पर टिके रहते है, अगर ठप हुआ तो डेरा डंडा उठाकर कही और चल देते है। इस तरह से हम लोगो कि घूमन्तु जिंदगी सड़को के किनारे कटती रहती है पेट के लिए। भारत मे ऐसे कई प्रदेश है जहाँ के लोगो द्वारा इस प्रकार कि जिंदगी जीने पर मजबूर है।
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