सुरक्षा के बिना विकास, जनता की जान जोखिम में

खुला नाला बना हादसों का कारण: हनुमान मंदिर चौराहे पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी, प्रशासन मौन


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर में चल रहे सीसी रोड और नाला निर्माण कार्य ने जहां एक ओर विकास की उम्मीद जगाई है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने आम जनता की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। विशेष रूप से हनुमान मंदिर चौराहे के पास निर्माणाधीन नाले को खुला छोड़ देने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
निर्माण कार्य के दौरान न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी संकेत लगाए गए हैं। परिणामस्वरूप राहगीरों, दोपहिया चालकों और स्कूली बच्चों के लिए यह क्षेत्र खतरे का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब रोशनी की कमी के कारण खुला नाला दिखाई नहीं देता और लोग अनजाने में उसमें गिरकर घायल हो जाते हैं।

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हनुमान मंदिर चौराहे पर प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में निर्माण कार्य के चलते सड़क का संकरा होना और नाले का खुला रहना जाम की समस्या को भी बढ़ा रहा है। कई बार एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के वाहन भी इस जाम में फंस जाते हैं, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर “कुंभकर्ण की नींद” सो रहा है और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कई लोग इस खुले नाले में गिरकर घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके, न तो निर्माण एजेंसी ने कोई सुरक्षा उपाय किए हैं और न ही प्रशासन ने इसकी सुध ली है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

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शहर में विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा प्रदान करना होता है, लेकिन जब यही कार्य लापरवाही के साथ किए जाएं तो वे समस्या का कारण बन जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए, जिसमें बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और रात में प्रकाश की व्यवस्था शामिल है।
जनता की मांग है कि प्रशासन तत्काल इस मामले का संज्ञान ले और निर्माण स्थल पर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब तक नजरअंदाज करता है या फिर जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाता है।

Editor CP pandey

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