शहर जाने की मजबूरी खत्म? गांव के पंचायत सचिवालय में कंप्यूटर, इंटरनेट और प्रतियोगी परीक्षा की किताबें

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गांवों में खुला डिजिटल ज्ञान का दरवाजा! 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंची डिजिटल लाइब्रेरी, 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन-टैबलेट

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदलने का दावा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, प्रदेश की डिजिटल लाइब्रेरी व्यवस्था अब 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है। करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से ज्यादा स्कूलों में आईसीटी लैब के जरिए पढ़ाई को तकनीक से जोड़ा गया है।
इस बदलाव की एक तस्वीर बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक स्थित खसहा मोहम्मदपुर गांव में दिखाई देती है। यहां ग्राम पंचायत सचिवालय में डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की गई है, जहां विद्यार्थियों और युवाओं को किताबों के साथ डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की सुविधा भी मिल रही है।
खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाईस्पीड इंटरनेट और वाई-फाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी यहां रखा गया है। इससे गांव में रहने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के लिए हर बार शहर का रुख करने की जरूरत कम हो रही है।
सबसे बड़ा फायदा उन युवाओं को मिल रहा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। पहले किताबें, इंटरनेट और अन्य शैक्षिक संसाधनों के लिए शहर तक आने-जाने में समय और पैसा खर्च होता था। अब गांव में ही अध्ययन का माहौल उपलब्ध होने से विद्यार्थी उस समय का इस्तेमाल पढ़ाई और ई-लर्निंग में कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के लगभग 76 स्थानों तक सीमित थी। अब इसका विस्तार 57,600 ग्राम पंचायतों तक हो गया है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट दिए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने साझा की है।
स्कूली शिक्षा में भी तकनीक का दायरा बढ़ा है। प्रदेश के 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से ज्यादा विद्यालयों में आईसीटी लैब संचालित होने की बात कही गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल कंटेंट और आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2012 से 2016 के बीच की शिक्षा व्यवस्था का आंकड़ा भी सामने रखा। उनके अनुसार, उस अवधि में पर्याप्त सरकारी निधि उपलब्ध होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकीं, जबकि 97 लाख बच्चे यूनिफॉर्म से वंचित रहे।
खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी को ग्रामीण क्षेत्रों में बदलते शैक्षिक माहौल के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। ग्राम पंचायत सचिवालय अब केवल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र न रहकर पढ़ाई, डिजिटल संसाधन और ई-लर्निंग की सुविधाओं से भी जुड़ रहे हैं। यदि ऐसी सुविधाओं का प्रभावी संचालन और नियमित उपयोग सुनिश्चित होता है, तो गांव के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं और आधुनिक शिक्षा की तैयारी का रास्ता पहले की तुलना में काफी आसान हो सकता है।

Editor CP pandey

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