No Income Tax In Dubai: दुनिया भर में मशहूर है कि दुबई में पर्सनल इनकम टैक्स नहीं लगता। यानी यहां काम करने वाले लोगों को अपनी सैलरी पर टैक्स नहीं देना पड़ता। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर इनकम टैक्स नहीं है तो सरकार कमाई कैसे करती है?
असल में दुबई की अर्थव्यवस्था बेहद विविध (diversified) है और यह सर्विस, ट्रेड, टूरिज्म और स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट पर आधारित मॉडल से रेवेन्यू जुटाता है।
सरकारी फीस और सर्विस चार्ज
दुबई की आय का बड़ा हिस्सा सरकारी फीस से आता है।
• वीजा और रेजिडेंसी परमिट फीस
• वर्क परमिट चार्ज
• ट्रेड लाइसेंस और उसका रिन्यूअल
• म्युनिसिपल टैक्स और प्रॉपर्टी फीस
• ट्रैफिक फाइन और अन्य प्रशासनिक जुर्माना
शहर में रहने वाले लाखों प्रवासी इन सेवाओं के लिए नियमित भुगतान करते हैं, जो सरकार की स्थिर आय बनाते हैं।
कॉरपोरेट और इनडायरेक्ट टैक्स
हालांकि पर्सनल इनकम टैक्स नहीं है, लेकिन बिजनेस पर टैक्स लगता है।
• 2023 से यूएई में AED 3,75,000 से ज्यादा के प्रॉफिट पर 9% कॉरपोरेट टैक्स
• 5% वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) ज्यादातर सामान और सेवाओं पर
• विदेशी बैंकों पर लगभग 20% टैक्स
• तेल कंपनियों पर 55% तक टैक्स
इससे सरकार को मजबूत राजस्व प्राप्त होता है।
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टूरिज्म और एविएशन से अरबों की कमाई
टूरिज्म दुबई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं।
• होटल बुकिंग पर टूरिज्म लेवी
• रेस्टोरेंट और एंटरटेनमेंट से टैक्स
• दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से डिपार्चर और सर्विस चार्ज
एविएशन सेक्टर से होने वाली कमाई सरकार के लिए बड़ा स्त्रोत है।
सरकारी कंपनियों से डायरेक्ट प्रॉफिट
दुबई कई सफल सरकारी कंपनियों का मालिक है, जो सीधे रेवेन्यू देती हैं।
• एमिरेट्स एयरलाइन
• रियल एस्टेट प्रोजेक्ट जैसे बुर्ज खलीफा
• कमर्शियल लीजिंग और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट
ये कंपनियां सरकार को लाभांश (dividend) और प्रत्यक्ष मुनाफा देती हैं।
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