वेरिफिकेशन में लापरवाही: 72 हजार शिक्षकों के दस्तावेज फंसे, शिक्षा विभाग चिंतित

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण–पत्रों की जांच (Bihar Teacher Certificate Verification Pending) वर्षों से जारी है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय लापरवाही के कारण अब तक हजारों सर्टिफिकेट लंबित पड़े हुए हैं। हालात यह हैं कि कई जिलों में आज भी ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिनकी शैक्षणिक योग्यता की आधिकारिक पुष्टि पूरी नहीं हो सकी है। जिस गति से वेरिफिकेशन का काम चल रहा है, उसे देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दस वर्षों में भी यह प्रक्रिया पूरी होना मुश्किल लग रहा है।

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 72,287 शिक्षकों के प्रमाण–पत्र विभिन्न बोर्डों और विश्वविद्यालयों में फंसे हुए हैं। सबसे अधिक लंबित 46,681 दस्तावेज बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के पास हैं। वहीं संस्कृत बोर्ड, मदरसा बोर्ड, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, मिथिला विश्वविद्यालय और पटना विश्वविद्यालय में भी हजारों प्रमाण–पत्र सत्यापन के इंतजार में हैं।

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प्राथमिक शिक्षा सचिव दिनेश कुमार ने सभी जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे लंबित सर्टिफिकेट का सत्यापन संबंधित बोर्डों व विश्वविद्यालयों से शीघ्र कराएं। यह प्रक्रिया 2014 में हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए लागू की गई थी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जनवरी तक कुल 3,52,927 शिक्षकों और लाइब्रेरियन की नियुक्ति से जुड़ा वेरिफिकेशन कार्य अधूरा था। सचिवों के पास नियुक्ति के दस्तावेज सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी, लेकिन कई मामलों में समय पर कागजात उपलब्ध नहीं कराए जा सके। हालांकि विभाग ने कार्रवाई के संकेत दिए थे, लेकिन वह अभी तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है।

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शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए यह आवश्यक है कि प्रमाण–पत्रों की जांच शीघ्र पूरी की जाए, अन्यथा इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।

Editor CP pandey

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