महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। चार दिनों से लगातार हो रही अतिवृष्टि और गंडक बैराज से करीब 4.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नारायणी नदी के बढ़े जल स्तर ने जिले में बाढ़ की आशंका बढ़ा दी है। निचलौल तहसील के कई संवेदनशील इलाकों में पानी बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। स्थिति को देखते हुए रविवार को जिलाधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने मोर्चा संभाला और प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने टेलफाल पहुंच कर नारायणी के जल स्तर और आस-पास की स्थिति देखी। इसके बाद गेंड़हवा गांव पहुंच कर करीब 350 प्रभावित परिवारों से संवाद किया और राहत- बचाव की तैयारियों को मौके पर परखा।
गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद नारायणी का जल स्तर बढ़ा हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में राहत कार्य शुरू करने में देरी न हो। उन्होंने बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक टीमों की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान डीएम-एसपी गेड़हवा गांव पहुंचे, जहां अतिवृष्टि के कारण करीब 350 परिवार बाढ़ जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावित परिवारों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के लिए अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए गए।
डीएम ने उपजिलाधिकारी निचलौल को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को राशन किट तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही कम्युनिटी किचन शुरू कराने को कहा, ताकि जल-भराव और बाढ़ जैसे हालात में लोगों के सामने भोजन का संकट न खड़ा हो। प्रशासन ने राहत व्यवस्था को जरूरत के मुताबिक और विस्तार देने के निर्देश भी दिए। प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी ने प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल मेडिकल यूनिट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। टीम को आवश्यक दवाओं और चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ सक्रिय रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल उपचार मिल सके।
डीएम ने प्रभावित गांवों में पशुओं के लिए अलग सुरक्षित स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए। वहां पर्याप्त भूसा और चारे की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि बाढ़ की स्थिति में पशुधन को लेकर ग्रामीणों को परेशानी न उठानी पड़े।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने पुलिस बल और क्विक रिस्पांस टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल स्तर तेजी से बढ़ने अथवा स्थिति बिगड़ने पर प्रभावित नागरिकों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बाढ़ जैसे हालात वाले प्रत्येक क्षेत्र में राहत एवं बचाव से जुड़े सभी इंतजाम पहले से तैयार रहें। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और पशुधन की रक्षा सुनिश्चित करना है।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी (वि/रा) डॉ. प्रशांत कुमार, उपजिलाधिकारी निचलौल अवनीश त्रिपाठी, तहसीलदार निचलौल अमित सिंह सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहें।
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