तिहाड़ से रिहा होकर अमेरिका पहुंचा UAPA आरोपी, विदेशी नागरिकों की जमानत पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। करीब छह महीने पहले कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की तिहाड़ जेल से रिहाई और उसके बाद अमेरिका पहुंचने का मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। वैनडाइक के साथ गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों को भी अदालत से डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया। मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इन सभी पर पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील इलाकों में बिना जरूरी अनुमति के प्रवेश करने और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
13 मार्च को हुई थी गिरफ्तारी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 13 मार्च 2026 को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई को काउंटर-टेरर जांच से जोड़कर देखा गया। आरोप था कि आरोपियों ने भारत में प्रवेश करने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र के रास्ते म्यांमार जाने का प्रयास किया। वैनडाइक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों की पहचान हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर के रूप में हुई।
मैथ्यू वैनडाइक कौन है?
मैथ्यू आरोन वैनडाइक अमेरिका के बाल्टीमोर का रहने वाला बताया जाता है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ, फिल्ममेकर और युद्ध क्षेत्रों में काम करने वाला व्यक्ति बताता रहा है। वह अपने बारे में मर्सिनरी यानी भाड़े के सैनिक के तौर पर भी उल्लेख करता रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान वह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोही गुट के साथ था। इस दौरान उसे गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था। बाद में उसके जेल से निकल भागने की बात भी सामने आई।
वैनडाइक की वेबसाइट के मुताबिक उसने 2007 से 2010 के बीच मोटरसाइकिल से कई अरब देशों की यात्रा की। उसने इराक और अफगानिस्तान में युद्ध संवाददाता तथा डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर के तौर पर काम करने का भी दावा किया है।
2014 में पत्रकार जेम्स फोले और स्टीवन सोटलॉफ की ISIS द्वारा हत्या के बाद वैनडाइक ने Sons of Liberty International (SOLI) नामक संगठन की स्थापना की। संगठन खुद को गैर-लाभकारी संस्था बताता है और विभिन्न देशों में सुरक्षा तथा सैन्य प्रशिक्षण देने का दावा करता है। हालांकि इन दावों और संगठन की गतिविधियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
UAPA मामले में 180 दिन पूरे होने के बाद बदली तस्वीर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सितंबर में सामने आया। वैनडाइक की UAPA के तहत गिरफ्तारी के 180 दिन की अवधि 8 सितंबर को पूरी हो रही थी। इसी दौरान NIA ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की, लेकिन उसमें UAPA की धाराएं शामिल नहीं थीं।
नई चार्जशीट में वैनडाइक के खिलाफ Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराएं 21 और 23 लगाई गईं। NIA ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़ी जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
इसके बाद 18 सितंबर को विशेष NIA अदालत ने वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दे दी। अदालत के आदेश के अनुसार उसे एक लाख रुपये के निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत मिली। अदालत ने यह भी माना कि जांच एजेंसी ने UAPA से संबंधित जांच पूरी किए बिना चार्जशीट दाखिल की थी, ऐसे में आरोपी के डिफॉल्ट बेल के अधिकार को नकारा नहीं जा सकता।
छह यूक्रेनी नागरिकों को भी मिली राहत
इसके बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को भी 23 सितंबर को डिफॉल्ट बेल मिल गई। इमिग्रेशन से संबंधित मामलों का निपटारा FRRO यानी Foreigners Regional Registration Office में निर्धारित कंपाउंडिंग राशि के भुगतान के बाद किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक आरोपी से 5.5 लाख रुपये की कंपाउंडिंग राशि ली गई।
इसके अगले दिन, 24 सितंबर को मैथ्यू वैनडाइक और अन्य छह विदेशी नागरिक तिहाड़ जेल से बाहर आ गए।
विदेश जाने की अनुमति कैसे मिली?
मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि जब NIA की ओर से जांच जारी रहने की बात अदालत में कही गई और भविष्य में पूरक चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना भी बनी हुई है, तब इन विदेशी नागरिकों को अपने-अपने देश जाने की अनुमति कैसे मिली।
अदालत ने जमानत की शर्तों के तहत उन्हें सीमित अवधि के लिए अपने देश जाने की अनुमति दी। यही वजह है कि जेल से रिहाई के बाद वैनडाइक अमेरिका पहुंच चुका है। हालांकि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जांच पूरी तरह समाप्त हो गई है। NIA के मुताबिक जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
रिहाई पर सियासी घमासान
वैनडाइक की रिहाई के बाद मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। कांग्रेस और AIMIM समेत विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने वैनडाइक की रिहाई को लेकर सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि अगर वह जांच के दायरे में था तो उसे भारत का वीजा कैसे मिला और भारत के रास्ते म्यांमार जाने की अनुमति किस आधार पर मिली।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि UAPA के मामलों में आम भारतीय नागरिकों और विदेशी आरोपियों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस मामले के उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती।
फिलहाल जांच का रास्ता खुला
मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों की जेल से रिहाई को मामले का अंतिम निपटारा नहीं माना जा रहा है। अदालत से मिली डिफॉल्ट बेल मुख्य रूप से चार्जशीट और निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होने से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर आधारित है। NIA ने स्पष्ट किया है कि UAPA से संबंधित जांच जारी है और आगे पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
अब इस मामले में आगे की जांच और संभावित पूरक चार्जशीट पर निगाह रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अदालत के समक्ष जांच एजेंसी आगे क्या तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करती है।
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