मेरी कविता: मान करोगे मान मिलेगा

बड़े बुजुर्ग कहते थे जो जिसके पास
होता है, वही दूसरों को दे पाता है,
जो दूसरों को आदर देता है वह स्वयं
भी तो आदरणीय हो जाता है।

सम्मान और अभिमान दो शब्दों में
केवल दो अक्षरों का फ़र्क़ होता है,
परंतु दोनो शब्दों के अर्थ और भाव
में ज़मीन आसमान सा अन्तर है ।

अभिमान तब होता है जब हम मान
लेते हैं कि हमने बहुत काम किया है,
सम्मान तब होता है जब सभी मान लें
कि हमने बहुत बड़ा काम किया है ।

हमें उन फलों जैसा स्वयं
उपयोगी बनना चाहिए,
जिनमें नमक लगायें तो भी
अत्यंत स्वादिष्ट बन जाते हैं।

ऐसा जीवन तो न जियें कि
कितना भी मीठा खायें, या
मीठा बोलें पर हर स्थिति
में मुँह से ज़हर ही उगलें ।

ज्ञान चक्षु जब खुल जाते हैं
हम तभी सत्य देख पाते हैं,
आदित्य सत्य की राहों पर ही
मान सम्मान मिल पाते हैं।

कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य

rkpnews@somnath

Recent Posts

डॉ. सत्यवान सौरभ पत्रकारिता साहित्य और सामाजिक चिंतन का सशक्त स्वर

हिसार (राष्ट्र की परम्परा)। डॉ. सत्यवान सौरभ समकालीन हिंदी पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चिंतन के…

33 minutes ago

कहानी के जरिए सीखेंगे यूपी के नौनिहाल, बालवाटिका से मजबूत होगी शिक्षा की नींव

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर यूपी के बालवाटिकाओं में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ अभियान, बच्चों…

3 hours ago

बारिश ने बिगाड़ा कोयले का गणित, देश के 57 बिजलीघर संकट में; अब बढ़ाई गई सप्लाई

थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का संकट, 57 बिजलीघर क्रिटिकल स्टॉक में; झारखंड की बारिश…

3 hours ago

सुखोई-30MKI की बढ़ेगी हवाई ताकत, दुश्मन के विमानों को दूर से निशाना बनाने की तैयारी

सुखोई-30MKI की ताकत बढ़ाने की तैयारी, PL-15 के जवाब में RVV-BD पर भारत की नजर…

4 hours ago

विकास की दौड़ में बुजुर्ग पीछे क्यों छूट रहे हैं?

माता-पिता वृद्धाश्रम में, बच्चे विदेश में—क्या यही है आधुनिक सफलता की कीमत?सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों…

4 hours ago